लेकिन समर्थन में कोई नियम या सबूत नहीं दिए गए। पठानिया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सदन की अवमानना है और इसलिए वह इसे पूरी तरह से खारिज करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सदस्य विधानसभा में जनहित के मुद्दे उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। इस मंच का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं कर सकते। हल्के मूड में कुछ भी कहा जा सकता है, लेकिन सदन नियमों का हवाला दिए बिना मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी दलीलें उल्लंघन के दायरे में आती हैं और इन्हें खारिज कर दिया जाएगा।
रिकॉर्ड के अनुसार संपादित करने के बाद ही चलाए जा सकते हैं वीडियो
पठानिया ने कहा कि सदन की कार्यवाही को यूट्यूब चैनल के माध्यम से केवल तभी प्रसारित किया जा सकता है, जब हर सदस्य के भाषण को सदन के रिकॉर्ड के अनुसार संपादित किया जाए। उन्होंने कहा कि सदस्यों के भाषण बिना संपादित किए प्रेस में नहीं जाएंगे और प्रसारण से पहले उनकी पुष्टि की जाएगी।