उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि बिल में संशोधन पर सनसनी पैदा करना सही नहीं है। मैंने उद्योगों में काम किया है। यूनियन में रहे हैं, इस कानून में संशोधन की जरूरत है। कई प्रदेशों में यह संशोधन पहले ही हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक का एक तिमाही में तीन महीने के 75 घंटे के ओवटाइम को 115 घंटे का कर दिया गया है। यह व्यवस्था मजदूरों के लिए है। ऐसा नहीं है कि हड़ताल में जाने का हक छीन लिया गया है। 15 दिन के बजाय हम 60 दिन के वेतन को देने की बात कर रहे हैं। अभी तक नियोक्ता 100 को ही रोजगार देते थे, अब 200 से अधिक कामगारों को रोजगार देना होगा। मजदूरों को भी लाभ होने वाला है। विपक्ष के सदस्यों के मन में जो शंकाएं हैं, वह सही नहीं हैं। सरकार मजदूर विरोधी नहीं है।
जो ठीक से काम करेगा, उसे समस्या नहीं है, जिसे काम नहीं करना है उसे ही समस्या होगी। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि आप मजदूरों की गर्दन काटकर एक आंख देने की बात कर रहे हैं। विकास का जो रास्ता रोजगार पैदा नहीं कर सकता है, वह सही नहीं है। कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने सिंघा का समर्थन किया। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी के बीच सदन में नोकझोंक हो गई। इस पर सीएम जयराम ठाकुर ने विपक्ष को टोकते हुए कहा कि कि आम तौर पर जब बिल पर चर्चा होती है तो उसमें स्थिति स्पष्ट की जाती है। अगर तथ्यों पर न बोल रहे हों तो कोई भी बोल सकते हैं। यह संसदीय कार्य मंत्री हैं और विधि मंत्री हैं। ऐसे कहना कि उनके पास यह विभाग नहीं है। यह सही नहीं है।
विपक्ष के विधायकों और माकपा विधायक राकेश सिंघा के भारी विरोध के बीच सदन में उद्योगों, कारखानों और श्रमिकों से संबंधित तीन बिलसदन में पारित किए गए हैं। सदन में सबसे पहले वर्ष 1947 के बने औद्योगिक विवाद अधिनियम को संशोधित करने के लिए रखे गए बिल पर कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी को चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया। उनके बाद माकपा विधायक राकेश सिंघा भी चर्चा में शामिल हुए। सदन में इस विधेयक पर सिंघा खूब आक्रामक रहे। उन्होंने आजादी के बाद देश की किसी विधायिका में पारित किया जा रहा काला कानून बताते हुए इसका विरोध किया। इसी तरह से कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इसमें कई प्रावधानों को मजदूर विरोधी करार देते रहे। इसी तरह से 1970 के बने ठेका श्रम कानून और 1948 में बने कारखाना अधिनियम के लिए रखे गए संशोधन बिलों पर भी चर्चा हुई।
इन्हें भी विपक्ष और माकपा विधायक राकेश सिंघा मजदूर विरोधी बताते रहे। बीच मे संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी में तो नोकझोंक तक की नौबत आ गई। बीच में मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पडा। बाद में मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष के विधायक और माकपा विधायक राकेश सिंघा विरोध में सदन से बाहर चले गए। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि विपक्ष के आरोप गलत हैं। इन बिलों में मजदूरों के हितों का ध्यान रखा गया है। यह एकतरफा बात कर रहे हैं। सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा मानते हैं कि इससे ठेका प्रथा बढ़ेगी। पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया गया है। कारखाना एक्ट में संशोधन सिर्फ इमरजेंसी में किया जा सकता है। मजदूर इन संशोधन विधेयकों का विरोध करेंगे।