शीतकालीन सत्र के समापन पर सत्तापक्ष और विपक्ष ने बेशक अपनी सफलता की कथित आहुतियां डालने के दावे किए लेकिन असलियत में विधानसभा परिसर के भीतर पहले दिन से ही नियम तोड़ने का खेल शुरू हुआ और सियासी मौज होती रही। सत्र के पहले दिन मुकेश अग्निहोत्री को विधानसभा के गेट पर सुरक्षा कर्मियों ने रोका तो माननीयों के प्रवेश का पुराना फैसला बदल गया।
राज्यपाल, विस अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री के अलावा सभी विधायकों के लिए विस का मुख्य गेट खोल दिया गया। सदन में सत्तापक्ष की गैलरी और लंच हाल में रोजाना भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का मेला चर्चा का विषय बना रहा। सदन के भीतर मोबाइल फोन और इंटरनेट का दनादन चलना सुरक्षा व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता रहा। लगातार दो दिन प्रश्नकाल के बाद विपक्ष की गैरमौजूदगी से क्षुब्ध जनता सदन की दर्शकदीर्घा से गायब होती दिखी।
विपक्ष के बार-बार वॉकआउट से सदन का हृदय प्रश्नकाल घायल हुआ। शीतकालीन सत्र के बहाने पहली बार नेताओं और अफसरों की पत्नियों की पिकनिक ने जनता का ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री के रात्रिभोज का निमंत्रण पत्र प्रधान सचिव के नाम से चर्चित हो गया। बड़े पद की लालसा ने नेताओं को चाटुकारिता के लिए मजबूर किया। सदन में भाजपा, कांग्रेस और सीपीआईएम तीनों दल सियासी मैनेजमेंट की धुरी बने रहे।
जयराम ठाकुर ने मिस्टर कूल का मिथक तोड़ा और मुकेश अग्निहोत्री ने सियासी वाहवाही लूटी। हालांकि, सदन में कांग्रेस की गुटबाजी की झलक दिखती रही।भाजपा मंडल के पोस्टर में छोटे हो गए कपूर शीत सत्र में भाजपा मंडल धर्मशाला की भूमिका बदल गई। तपोवन तक लगे भाजपा मंडल के पोस्टरों में किशन कपूर की जगह विशाल नैहरिया ने ले ली। किशन कपूर को छोटी सी फोटो में समेट दिया गया।