हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के आठवें दिन वीरवार को 300 यूनिट निशुल्क बिजली और 1500 रुपये पर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा किया। बोलने का मौका न मिलने पर भाजपा विधायकों ने वेल में जाकर नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस की गारंटियों को लेकर दोनों पक्षों में नोकझोंक से सदन तपा रहा। जवाब में सीएम सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस की गारंटियां पांच साल के लिए हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने चुनाव प्रचार में झूठी गारंटियां देने का आरोप लगाया।
प्रश्नकाल में भाजपा विधायकों ने सरकार को घेरा
कांग्रेस की चौथी गारंटी 300 यूनिट निशुल्क बिजली को लेकर प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायकों ने सरकार को घेरा। भाजपा विधायकों ने चुनाव प्रचार की याद दिलाते हुए 125 यूनिट निशुल्क बिजली नहीं देने का आरोप लगाया। भाजपा विधायक विनोद कुमार ने मामला उठाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान तो कांग्रेस ने प्रतिमाह घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक बिजली निशुल्क देने की गारंटी दी थी। अब लोग पूछ रहे हैं कि निशुल्क बिजली कब से मिलेगी। विधायक ने कहा कि लोग बता रहे हैं कि अब 125 यूनिट बिजली खपत पर भी बिल आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 300 यूनिट बिजली के अलावा 1,500 रुपये प्रतिमाह, पांच लाख रोजगार और फलों की कीमत बागवानों की ओर से तय करने की गारंटियों को लेकर भी लोग पूछ रहे हैं। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने शोर शराबा कर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए।
विवेकपूर्ण सोच के साथ गारंटियां दीं: सीएम
जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने विवेकपूर्ण सोच के साथ गारंटियां दी हैं। चार साल में प्रदेश की बदहाल आर्थिक हालत को ठीक किया जाएगा। पहले बजट भाषण में कई गारंटियों की झलक दिखती है। 125 यूनिट निशुल्क बिजली योजना को बंद नहीं किया गया है। इस योजना के लिए 1,044 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बिजली बोर्ड को तीन माह में 300 करोड़ रुपये की सब्सिड़ी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बजट आने के बाद से परेशान हैं। चुनाव से पहले खुले संस्थानों के मामले में आवश्यकताओं को देखा जा रहा है। पूर्व सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद नहीं किया है। दोपहर बाद बजट पर हुई चर्चा को लेकर जब मुख्यमंत्री ने जवाब देना शुरू किया तो विपक्ष ने महिलाओं को 1500 रुपये देने का मामला उठाया। नेता विपक्ष ने इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष से बोलने की अनुमति मांगी। अध्यक्ष के इंकार करने पर विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। इसके बाद सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट चर्चा पर जवाब दिया।