हिमाचल में रिकार्ड मतदान के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मिशन रिपीट का दम भर रहे हैं। तो दूसरी तरफ भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी प्रेम कुमार धूमल भारी मतदान को बदलाव का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा को 50 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। मतदान के बाद आई रिपोर्टों से वीरभद्र मान रहे हैं कि कुछ सीटों पर टिकट आवंटन में गड़बड़ी नुकसान पहुंचा रही है।
प्रचार के मोर्चे पर अकेले डटे रहे वीरभद्र सिंह के चेहरे पर कोई थकान नहीं है, लेकिन भाजपा के प्रचार में भाषाई गिरावट का उन्हें दुख है। दूसरी तरफ, धूमल रिकार्ड मतदान से उत्साहित हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस को हर फ्रंट पर भाजपा ने मात दी है। बगावत से पार्टी को किसी तरह के नुकसान की आशंका को भी वह खारिज कर रहे हैं। मतदान के बाद दोनों दलों के प्रमुख नेताओं से अमर उजाला के विशेष संवाददाता अरुणेश पठानिया ने बातचीत की।
सवाल- रिकार्ड मतदान के बाद आपका क्या आकलन है? किसकी सरकार बनेगी ?
वीरभद्र- मतदान में वृद्धि और मिल रही सूचनाओं के बाद मैं आश्वस्त हूं कि कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बना रही है। पार्टी के तमाम प्रत्याशियों से बातचीत कर रहा हूं। सभी जगह से फीडबैक लेने के बाद आपको बता रहा हूं कि कांग्रेस मिशन रिपीट कर रही है। हालांकि कुछ सीटों पर पार्टी ने गलत टिकट दिये। शिमला, ठियोग, नालागढ़ जैसी चार- पांच सीटों में गड़बड़ी हई। यहां पार्टी के बागी उतरे हैं, जिससे पार्टी प्रत्याशी हार रहेे हैं। गड़बड़ी के बाद हमारी सरकार बन रही है।
सवाल- जब कमान आपके हाथ थी, फिर दूसरों का दखल कैसे हुआ?
वीरभद्र- मुझे कांग्रेस पार्टी ने चुनाव की कमान सौंपी, लेकिन टिकट आवंटन में मेरी चलती तो कइयों को टिकट नहीं मिलता। मैं भाई भतीजावाद पर विश्वास नहीं करता। मेरा सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशी पर फोकस था। ठियोग में क्या हुआ ? विद्या जी ने लड़ने से इंकार किया तो हमने खाची का नाम बताया, लेकिन दिल्ली से राठौर तय हो गया। मैं राठौर के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन वो एकदम नया चेहरा है। जब तक विद्या जी को दोबारा प्रत्याशी बनाने पर बात बनी, तो टाइम निकल गया। कुछ नेताओं ने अपनों को साधने के लिए प्रत्याशी तय करने में गड़बड़ की, जिससे लोग निर्दलीय भी खड़े हो गए।
सवाल- आपके करीबी ही बागी थे, फिर उनको मनाया क्यों नहीं ?
वीरभद्र- टिकट नहीं मिलने से नाराज हुए लोगों को मनाने के लिए मैने हरसंभव प्रयास किया। मेरी उनसे बातचीत हुई, लेकिन वे नहीं माने। शिमला में हरीश जनारथा मजबूत प्रत्याशी था, लेकिन आनंद शर्मा ने भज्ज्जी को टिकट दिलवाया। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि पार्टी हित में सोचना चाहिए कि कौन प्रत्याशी जीत रहा है। भज्जी ने तो प्रचार में मेरा चेहरा तो दूर राहुल गांधी को भी होर्डिंग बैनरों में इस्तेमाल नहीं किया। बस आनंद शर्मा की फोटो लगा ली। इससे क्या साबित करना चाहते हैं।
सवाल- पहले हुए चुनावों की तुलना में इस बार के चुनाव कितने अलग रहे?
वीरभद्र- हिमाचल में पढ़ा लिखा मतदाता है। मतदान प्रतिशत प्रदेश में लगातार बढ़ रहा है। पार्टी और मेरे शुभचिंतक भी बड़ी संख्या में वोट देने आए। यह मेरा आखिरी चुनाव है, लेकिन पहली बार मैंने प्रचार में विपक्ष का निम्न स्तर देखा। गृहमंत्री राजनाथ को छोड़कर हर भाजपा नेता ने असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया। पीएम मोदी ने जिस तरह की भाषा इस्तेमाल की वे पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। भाजपा सफेद झूठ बोलती रही। दूसरी तरफ कांग्रेस में मैं अकेला मोर्चे पर डटा रहा। हमारे सारे मंत्री विधायक अपने हलकों में ही रहे।
सवाल- आपके बाद कांग्रेस में कौन लीडर है?
वीरभद्र- मेरा आखिरी चुनाव है, लेकिन पार्टी में कई नेता हैं जो उसे आगे ले जा सकते हैं। यह पार्टी को तय करना है कि सही व्यक्ति को आगे बढ़ाए।
सवाल- अर्की से चुनाव में उतरने क्या कारण हैं ?
वीरभद्र- मैं तो कहीं से भी चुनाव लड़ और जीत सकता हूं। शिमला से बाहर अर्की जाने की वजह ये थी कि वहां भाजपा लगातार जीत रही थी और शिमला से सटी हुई सीट है। इसके अलावा मैं कुटलैहड़ के अलाव एक और सीट पर भी विचार कर रहा था। मेरा मकसद सिर्फ भाजपा की मजबूत सीटों पर जाकर वहां स्थितियां बदलने का रहा।