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सीएम चेहरा घोषित नहीं करना पार्टी की सोची समझी रणनीति का हिस्सा : जेपी नड्डा

Sat, 28 Oct 2017 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि हिमाचल में अभी तक सीएम चेहरा घोषित नहीं करना पार्टी की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। कई राज्यों में बिना किसी सीएम उम्मीदवार के चुनावों में उतरी है। यह भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड के निर्णय से होता है। 
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जीएसटी के मुद्दे पर भाजपा ने अब नया पैंतरा निकाला है। नड्डा ने कहा कि जीएसटी अकेला केंद्र सरकार का नहीं बल्कि अन्य दलों की सहमति से हुआ है। जीएसटी काउंसिल में सभी दलों की राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व था, जिनकी सहमति के बिना लागू नहीं किया जा सकता। 

नड्डा बोले ये जीएसटी पीएम मोदी या वित्त मंत्री जेटली का नहीं सब लोगों का साथ मिलने से लागू हुआ है। शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान नड्डा ने कहा कि पार्टी हर राज्य की परिस्थितियों के हिसाब से अलग से रणनीति बनाती है।
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चार्जशीट के आरोपों की होगी जांच

हिमाचल में मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं देने के पीछे भी चुनावी रणनीति है। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के खिलाफ चार्जशीट में बीजेपी ने जो आरोप लगाए हैं उनकी सत्ता में आने के बाद जांच करवाई जाएगी। 

चार्जशीट में अनिल शर्मा का नाम  होने के सवाल पर नड्डा ने कहा कि इस मामले में सभी बारीकियों की जांच परख कर देखेंगे। उसके बाद ही तय किया जाएगा कि जांच के लिए भेजा जाए या नहीं। इस दौरान जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर जमकर हमला किया। 

उन्होंने कहा कि लोग वर्तमान कांग्रेस सरकार से दुखी हैं। मतदाता प्रदेश सरकार को उखाड़ कर हिमाचल में विकास की रफ्तार को नया आयाम देंगे। इससे पहले नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित तमाम स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम भी जारी किये। 
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ससुर- दामाद नहीं, भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि सोलन में ससुर और दामाद ही नहीं बल्कि पार्टियों की लड़ाई है। भाजपा ने अनुभव और योग्यता के आधार पर टिकट का आवंटन किया है। परिवारवाद की सियासत कांग्रेस कर रही है। मतदाता भाजपा या कांग्रेस को दिमाग में लेकर मतदान करने जाएंगे। 

नड्डा शुक्रवार को कंडाघाट में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग राह दिखाते हैं और कुछ लोग गुमराह करते हैं। मतदाता को ध्यान रखना चाहिए कि वो मूल बात से न भटकें।

ससुर को हराने या दामाद को जिताने के लिए नहीं बल्कि हिमाचल को बचाने के लिए मतदान करें। जब मुख्यमंत्री दिल्ली जाते हैं तो लोग उनसे पूछते हैं कि वे पेशी में आए हैं या किसी और काम से। हिमाचल देवी-देवताओं के लिए जाना जाता है वहीं मुख्यमंत्री के कारण हिमाचल बदनाम हो रहा है।

फोरेस्ट गार्ड की मौत सुसाइड केस था, तो अब हत्या का मामला कैसे दर्ज हुआ। आरटीओ के पास से नशे की खेप पकड़ी जाती है उस पर भी बाद में बयान बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में कानून व्यवस्था पटरी से उतर गई है।

नेशनल हाइवे पर केंद्र सरकार ने 230 करोड़ जारी किए हैं और यह धनराशि डीपीआर बनाने वाली कंपनी के पास आएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को आज तक जितने पैसे दिए हैं वो खर्च नहीं किए गए हैं।
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