सियासी सरगर्मी तेज होने के साथ ही आयकर विभाग भी हरकत में आ गया है। विभाग नामांकन करने वाले हर प्रत्याशी की पिछले पांच साल के दौरान बढ़ी घोषित आय और उस दौरान जमा किए गए कर की जांच में जुट गया है। इस संबंध में विभाग ने चुनाव आयोग से सभी प्रत्याशियों के नामांकन पत्रों के साथ दी गई संपत्ति की जानकारी मांगी है। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग की इस मशक्कत के बाद कई प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
नामांकन के दौरान प्रत्याशियों को अपनी वर्तमान चल अचल संपत्ति का ब्योरा देना होता है। पहले यह संपत्ति का ब्योरा आयोग के पास रहता था। अब चुनाव आयोग इस ब्योरे को आयकर विभाग के साथ साझा करता है। आयकर विभाग हलफनामे में दी जानकारी के आधार पर प्रत्याशी के पिछले पांच साल की संपत्ति की पड़ताल करता है।
साथ ही वह उसकी आय और उसके सापेक्ष में जमा किए गए टैक्स की जानकारी का भी मिलान करता है। अगर यह जानकारी विभाग की जानकारी से अलग होती है तो विभाग प्रत्याशी की संपत्ति की विस्तार से जांच शुरू कर देता है। सूबे के कई ऐसे नेता हैं जिनकी आय पिछले पांच साल में कई गुना बढ़ गई है, ऐसे में आयकर विभाग की उनपर खास नजर रहेगी।
वहीं, चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक एकाउंट खोलने की आयोग की नई व्यवस्था भी आयकर विभाग के लिए सहूलियत दे रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अब चुनावी खर्च और खाते में चुनाव के लिए आने वाले पैसे पर नजर रखने में आयोग के साथ साथ आयकर विभाग को भी आसानी होगी। सूत्रों का कहना है कि इस चुनाव में प्रत्याशी बमुश्किल 28 लाख रुपये की अधिकतम चुनावी खर्च की लिमिट को छू पाएंगे।
पचास हजार से ज्यादा कैश रखने पर बढ़ सकती है मुश्किलें
निर्वाचन आयोग ने लोगों से अपील की है कि आचार संहित के दौरान पचास हजार से ज्यादा की नकदी लेकर न चलें। साथ ही जरूरी होने पर नकद राशि होने पर अगर जांच एजेंसियां पूछताछ करें तो उन्हें दस्तावेज जरूर दिखा दें।
आयोग ने लोगों के लिए यह एडवाइजरी चुनाव के दौरान नकदी वितरण व मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले प्रयासों को विफल करने के लिए किया है।
सीईओ पुष्पेंद्र राजपूत ने कहा कि दस्तावेज न होने पर आयकर विभाग की मदद से राशि को सीज किया जा सकता है। बताया कि नकदी वितरण को रोकने के लिए स्टैटिक व मोबाइल सर्विलांस टीमें गठित कर जगह जगह तैनात की गई हैं।
घर में भी न रखे नकदी
राजपूत ने कहा कि घर में भी नकदी रखने से बचना चाहिए। कहा कि लोगों खासकर व्यापारियों को कहा गया है कि वह रोज का रोज कैश बैंक में जमा करते रहे।
घर में होने की नकदी होने की सूचना पर अगर जरूरी दस्तावेज न प्रस्तुत किए गए तो विभिन्न कानूनी के तरह कार्रवाई की जा सकती है।
कहा कि आयकर विभाग बैंकों के साथ मिलकर बैंक खातों से बड़ी मात्रा में नकदी निकालने पर भी निगरानी कर रहा है। इसके अलावा होटल, धर्मशालाओं व सरायों की भी निगरानी की जा रही है।
इन बिंदुओं का रखें ध्यान
- किसान-बागवान बिक्री से प्राप्त धनराशि ले जाते समय कृषि भूमि के आवश्यक दस्तावेज व बिक्री रसीद रखे साथ
- संपत्ति की बिक्री से संबंधित कैश ले जाते समय पंजीकरण दस्तावेज या समझौते की प्रतिलिपि रखे
- बैंक से नकदी निकाल कर ले जाते समय बैंक स्टेटमेंट साथ रखें
- बैंक में जमा करने के लिए कैश ले जाते समय व्यापारी कैशबुक की प्रतिलिपि साथ रखें
- कीमती सामान होने पर उसकी खरीद या बिक्री संबंधी रसीद अवश्य रखें
- गिफ्ट आइटम के परिवहन पर खरीद की रसीद होना जरूरी
- घर में कैश न रखें, छापा पड़ने पर दिखाएं जरूरी दस्तावेज