जरूरत से ज्यादा और बिना चिकित्सक सलाह के एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन खतरनाक साबित हो रहा है। एंटीबायोटिक रजिस्टेंस से मरीजों को हाई डोज दवाएं तक असर नहीं कर रही हैं। इससे सुपरबग का खतरा पैदा हो गया है। प्रदेश के अस्पतालों में ऐसे मामले आ रहे हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि 45 फीसदी मामले ऐसे मिले हैं जिन पर इस प्रकार की दिक्कत देखी गई है, यानी दवाएं असर नहीं कर रही हैं। इसके अलावा यूरिन जांच में पाया गया कि 51 फीसदी मामलों में मूत्र मार्ग में फैलाने वाले बैक्टीरिया के उपचार के लिए मिलने वाली दवाएं भी असर ही नहीं कर रही हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण बिना चिकित्सक की सलाह के मनमर्जी से अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है। वहीं, अगर कोई बीमार होने पर एंटीबायोटिक का सेवन करता है और उसे थोड़ी राहत मिल जाती तो वह कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं। इससे जीवाणुओं को सुपरबग बनाने में मदद मिल रही है। इससे अब बीमारी का उपचार करने के लिए चिकित्सकों को भी दिक्कतें आ रही हैं। वर्ष 2025 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में सूक्ष्मजीव विज्ञान और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने अध्ययन किया। इसमें 14,312 मरीजों के सैंपलों की जांच की गई। जांच के दौरान तथ्य खुलासा हुआ है।
ये उठाए जा सकते हैं कदम
बिना कल्चर टेस्ट दवा पर पाबंदी प्रिस्क्रिप्शन का नियमित ऑडिट, आईसीयू में सख्त सेनिटाइजेशन
ऐसे बचें
सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर एंटीबायोटिक न लें, पहले सलाह लें। चिकित्सक की ओर से लिखी गई दवा को आधे में न छोड़ें।