फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: स्कूलों में सौ फीसदी नियुक्ति की मांग पर हड़ताल पर रहेंगी आंगनबाड़ी वर्कर

Wed, 22 Sep 2021 05:08 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

यूनियन अध्यक्ष नीलम जसवाल और महासचिव वीना शर्मा ने कहा है कि आंगनबाड़ी कर्मियों को प्री प्राइमरी स्कूलों में सौ प्रतिशत नियुक्ति दी जानी चाहिए। इस नियुक्ति में 45 वर्ष की शर्त खत्म की जाए।
विज्ञापन
नीलम जसवाल, प्रदेश अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश के प्री-प्राइमरी स्कूलों में सौ फीसदी नियुक्ति की मांग को लेकर 24 सितंबर को आंगनबाड़ी वर्कर हड़ताल पर रहेंगी। आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन (संबंधित) सीटू ने अखिल भारतीय आह्वान पर यह फैसला लिया है। इस दौरान प्रदेश भर में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला लिया है। आईसीडीएस के निजीकरण और पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश भर में प्रदर्शन भी किए जाएंगे।

विज्ञापन


यूनियन अध्यक्ष नीलम जसवाल और महासचिव वीना शर्मा ने कहा है कि आंगनबाड़ी कर्मियों को प्री प्राइमरी स्कूलों में सौ प्रतिशत नियुक्ति दी जानी चाहिए। इस नियुक्ति में 45 वर्ष की शर्त खत्म की जाए। सुपरवाइजर नियुक्ति के लिए भारतवर्ष के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय की डिग्री मान्य होनी चाहिए। वरिष्ठता के आधार पर मैट्रिक और ग्रेजुएशन पास को सुपरवाइजर पद पर भर्ती किया जाए। 

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर बीते लंबे समय से छोटे बच्चों की देखभाल कर रही हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों में खोली गई नर्सरी और केजी की कक्षा में शिक्षक नियुक्त करने के लिए सिर्फ उन्हें ही तैनाती दी जाए। यूनियन ने हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने, रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष करने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि नंद घर बनाने की आड़ में आईसीडीएस को एक कंपनी के हवाले करके निजीकरण की साजिश रची जा रही है।
विज्ञापन


यूनियन ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन और तीस प्रतिशत बजट कटौती का भी विरोध किया है। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर आईसीडीएस का निजीकरण किया गया व आंगनबाड़ी वर्करों को नियमित कर्मचारी घोषित न किया गया तो आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को वापस लेने की मांग की है। कहा कि यह नीति आइसीडीएस विरोधी है।

शिक्षा नीति में वास्तव में आइसीडीएस के निजीकरण का छिपा हुआ एजेंडा है। आईसीडीएस को एक कंपनी के हवाले करने के लिए नंद घर की आड़ में निजीकरण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे भविष्य में कर्मियों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से वर्ष 2013 में हुए 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार आंगनबाड़ी कर्मियों को नियमित करने की मांग की है। आंगनबाड़ी कर्मियों को वर्ष 2013 का नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के तहत बकाया राशि का भुगतान तुरंत करने की मांग की है। 

प्री-प्राइमरी में एनटीटी को मिले प्राथमिकता : महासंघ
हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के शिष्टमंडल ने शिक्षकों से जुड़ी मांगों को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुलाकात की। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महेंद्र कपूर, संयुक्त मंत्री पवन मिश्रा, शिक्षक महासंघ के उपाध्यक्ष डॉ. मामराज पुंडीर, कॉलेज शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने विभिन्न वर्गों के शिक्षकों से जुड़ी मांगों को मुख्यमंत्री से अवगत कराया।

महासंघ ने 2010 से पहले नियुक्त टीजीटी को पदोन्नति में मुख्याध्यापक और प्रवक्ता दोनों ऑप्शन बहाल करने की मांग की। प्रदेश में नर्सरी अध्यापिकाओं की भर्ती के लिए निश्चित आरएंडपी नियम बनाने की बात कही ताकि भविष्य में नियमों की आड़ में अध्यापकों का शोषण न हो। नर्सरी के लिए एनटीटी का प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापिकाओं को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती करने, शिक्षा विभाग में 20 वर्ष से कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों के लिए तर्कसंगत नीति बनाकर शिक्षा विभाग में शामिल करने, प्रवक्ता न्यू के स्थान पर सीधे प्रवक्ता पदनाम बहाल करने, वर्ष 2012 से पहले जेबीटी से पदोन्नत हुए मुख्य शिक्षकों को वेतन वृद्धि प्रदान करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के साथ प्रधानाचार्यों को पदोन्नति का नियमित लाभ प्रदान करने की मांग रखी। उपाध्यक्ष डॉ. मामराज पुंडीर ने बताया कि विभिन्न वर्गों के शिक्षकों की मांगों से जुड़ी वित्तीय और नियमों संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से विभागीय स्तर पर विभिन्न कमेटियां गठित की गई हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें