16वें वित्त आयोग और केंद्र सरकार की ओर से आरडीजी को बंद किए जाने के कारण प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट में आ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य हित में सामूहिक और एकजुट दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। राज्य सरकार का मानना है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के हित में साझा निर्णय लिया जाना चाहिए। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद आरडीजी को 1 अप्रैल 2026 से बंद किए जाने का निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे हिमाचल प्रदेश को आगामी पांच वर्षों में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। यह अनुदान विशेष श्रेणी राज्य के रूप में हिमाचल के लिए वित्तीय आधार माना जाता रहा है। इसके बंद होने से विकास योजनाओं समेत सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों व वित्तीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे थे भाजपा विधायक
इससे पहले सरकार ने विधायक दल की बैठक भी बुलाई थी, लेकिन भाजपा विधायकों ने इससे किनारा किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर बैठक में उपस्थित नहीं हुए। बाकायदा इसको लेकर सरकार की तरफ से पत्र भी जारी किया गया था। अब सरकार ने शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है।