साल 2012 में धूमल सरकार के समय शुरू की गई यह योजना चलाने या बंद करने के संशय के बीच जयराम सरकार ने साल 2018 निकाल दिया था। जनवरी 2019 में सरकार ने लैपटॉप देने का फैसला लेते हुए स्कूलों के दस हजार मेधावियों की संख्या को कम करते हुए 8800 किया। इसमें दोनों कक्षाओं के 4400-4400 मेधावी शामिल किए।
कॉलेजों के 900 मेधावी भी शामिल किए गए। फरवरी 2019 में इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन ने लैपटॉप की खरीद शुरू की। मार्च में बिड प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन कंपनियां नहीं आने के चलते मामला लटक गया। इसके बाद इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन और शिक्षा निदेशालय के बीच विवाद खड़ा हो गया। इस कारण शिक्षा निदेशालय ने स्वयं ही खरीद करने का फैसला लिया है।