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दिल्ली में 58 साल बाद अक्तूबर महीना रहा सबसे ठंडा, लाहौल-स्पीति में सीजन की पहली बर्फबारी

Sun, 01 Nov 2020 04:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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cold delhi
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दिल्ली में 58 साल बाद अक्तूबर महीना सबसे ज्यादा ठंडा रहा। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, इस साल अक्तूबर महीने में न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1962 के बाद से सबसे कम है। तब न्यूनतम तापमान 16.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। आमतौर पर दिल्ली में अक्तूबर में न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।

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आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, बृहस्पतिवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री रहा था, जो बीते 26 सालों में सबसे कम था। इससे पहले 31 अक्तूबर 1994 को राजधानी में न्यूनतम तापमान 12.3 डिग्री रहा था। इस समय सामान्य न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री रहता है। आईएमडी के क्षेत्रीय सेंटर के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा, इस समय न्यूनतम तापमान का मुख्य कारण बादलों के कवर का ना होना है। इसके अलावा शांत हवा के कारण भी ठंड बढ़ी है। इस कारण धुंध व कोहरा बढ़ा है। अक्तूबर महीने में दिल्ली में सबसे कम 9.4 डिग्री सेल्सियस तापमान 1937 में दर्ज किया गया था। 

बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर
राजधानी में शनिवार को भी वायु गुणवता सूचकांक खराब श्रेणी में बना रहा। इस कड़ी में शनिवार का औसतन वायु गुणवता सूचकांक 367 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले वायु गुणवता सूचकांक 374 दर्ज किया गया था। वहीं, बृहस्पतिवार को 395, बुधवार को 297, मंगलवार को 312 और सोमवार को 353 रहा था। हालांकि,सफर के अनुसार भी आगामी दो दिनों के भीतर राजधानी की हवा में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को हॉटस्पॉट क्षेत्रों में शामिल आनंद विहार का वायु गुणवता सूचकांक 387, बवाना में 403, जहांगीरपुरी में 429 व नरेला में 378 दर्ज किया गया। वहीं, पीएम 2.5 का स्तर  229 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। साथ ही पीएम10 का स्तर भी 370 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। जबकि पीएम 10 का स्तर 100 ग्राम घन मीटर से कम होने पर सुरक्षित माना जाता है।

पीएम10 बहुत सूक्ष्म कण होता है जिसका व्यास 10 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। यही वजह है कि यह आसानी से हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों को जन्म देता है जबकि पीएम 2.5 का स्तर 60 ग्राम प्रति घन मीटर से कम सुरक्षित माना जाता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, शनिवार को राजधानी में पराली के धुएं के हिस्सेदारी 32 फीसदी दर्ज की गई। इससे पहले बृहस्पतिवार को इस सीजन की सबसे अधिक 36 फ़ीसदी दर्ज की गई थी।

वहीं, शुक्रवार को दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में 3,471 पराली जलने की घटनाएं दर्ज की गई थी।इसके अलावा एनसीआर के शहरों की बात करें तो फरीदाबाद का वायु गुणवता सूचकांक 348, नोएडा का 356, ग्रेटर नोएडा का 368, गाजियाबाद का 364 और  गुरुग्राम वायु गुणवता सूचकांक 358 दर्ज किया गया। 

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लाहौल-स्पीति में सीजन की पहली बर्फबारी

1 - फोटो : अमर उजाला
अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल, लाहौल के मुख्यालय केलांग समेत कई इलाकों में शुक्रवार रात को सीजन की पहली बर्फबारी हुई। पूरी घाटी में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। बारालाचा में सबसे ज्यादा करीब 30 सेंटीमीटर तक बर्फबारी हुई है। इसके चलते मनाली-लेह मार्ग पर रविवार तक वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। हालांकि अटल टनल रोहतांग और रोहतांग दर्रा होकर वाहनों और बसों की आवाजाही जारी है। 

टनल के मुहाने पर बर्फ के नजारे लेने पर्यटक उमड़ पड़े। टनल बनने के बाद पहली बार नॉर्थ पोर्टल में बर्फबारी हुई है। इससे पर्यटन कारोबारियों के भी चेहरे खिल उठे हैं। उधर, चंबा जिले में शुक्रवार देर शाम साच पास समेत भरमौर की ऊंची चोटियों में बर्फबारी हुई और निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। चुराह और किहार में भी पहली बार बर्फबारी हुई है। राजधानी शिमला समेत कई इलाकों में बीती रात मौसम खराब रहा, हालांकि दिनभर धूप रही।

मौसम के अचानक करवट बदलने से घाटी का मौसम कूल-कूल हो गया है। लंबे समय से चल रहा शुष्क मौसम अब ताजा बर्फबारी के बाद ठंडक भरा हो गया है। बारालाचा में करीब 30 सेमी, दारचा में 20, जिस्पा में 15 और केलांग में 10 सेंटीमीटर ताजा हिमपात हुआ है। रोहतांग दर्रा में 5 और कोकसर में 6 सेंटीमीटर बर्फ रिकॉर्ड हुई है। तोद घाटी के साथ बारालाचा दर्रा में करीब एक फुट तक बर्फ गिरने की सूचना है।

एसपी मानव वर्मा ने बताया कि ताजा बर्फबारी के बाद मनाली-लेह मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। लेह जाने वाले वाहनों को स्तींगरी और केलांग के आसपास रोक दिया है। एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक मंगल मनेपा ने कहा कि बर्फबारी के बावजूद अटल टनल होकर बसों की आवाजाही जारी है।
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