सूबे में चिटफंड कंपनियों पर अंकुश लगाने के लिए जयराम सरकार सख्त कानून ला रही है। इसके लिए विधानसभा के शीत सत्र में संशोधन बिल लाया जा रहा है। जिसके पारित होने पर कंपनियों को ऑपरेट करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा बिल में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामलाें को गैर जमानती अपराध करने का प्रावधान होगा। कंपनी की संपत्ति कुर्क कर निवेशकों को पैसे लौटाने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रदेश का वित्त विभाग भारतीय रिजर्व बैंक के आदेशों के बाद जमाकर्ता के हितों को ध्यान में रखते हुए जमाकर्ता संरक्षण संशोधन बिल-2016 में फिर से बदलाव कर इसका मसौदा तैयार कर रहा है। इस संशोधन बिल के पारित होने से वित्तीय निवेशकों को सुरक्षा कवच मिल सकेगा।
राष्ट्रपति कार्यालय से वापस हुआ था बिल
मानसून सत्र में प्रदेश सरकार ने चिटफंड कंपनियों के खिलाफ लाए बिल को वापस लिया था। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ओर से पांच अप्रैल 2016 को भेजे गए हिमाचल प्रदेश जमाकर्ता संरक्षण संशोधन बिल-2016 को राष्ट्रपति कार्यालय ने कुछ कमेंट्स कर लौटा दिया था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने सदन में बताया था कि बिल में कुछ आपत्तियाें के चलते बिल वापस लिया जा रहा है।
वित्त विभाग के सचिव अक्षय सूद ने कहा कि आरबीआई ने चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सख्त कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत बिल तैयार किया जा रहा है।