अदालत ने सरकार के उस दावे को भी तथ्यों के विपरीत बताया जिसमें कहा गया था कि नीति बनाने के लिए कई विभागों की भागीदारी अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि राज्य की अधिकांश भूमि वन विभाग के पास है, इसलिए विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। न्यायालय ने राज्य में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ठोस नीति के अभाव में बरसात के दौरान मिट्टी का कटाव और भूस्खलन बढ़ रहा है। गर्मियों के सूखे मौसम में जंगलों में लगने वाली आग एक गंभीर समस्या है, जिसके समाधान के लिए जल संचयन और संरक्षण की नीतियां अति आवश्यक हैं।