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चिकित्सा सुविधाओं संबंधी नौ आरोपों पर हाईकोर्ट का सरकार से जवाब तलब

Fri, 07 May 2021 10:38 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार से इन आरोपों पर अगली सुनवाई 10 मई तक जवाब तलब किया है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कोरोना के कारण चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने को लेकर दायर याचिका में केंद्र व राज्य सरकार से नौ मुख्य आरोपों पर जवाब तलब किया है। प्रार्थी आशुतोष गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में चिकित्सा संकट है, जिस कारण शहरों ही नहीं, गांवों में भी संक्रमण बढ़ा है। प्रार्थी का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से कोरोना से मौतें बढ़ गईं, जिसका कारण ऑक्सीजन की भारी कमी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार से इन आरोपों पर अगली सुनवाई 10 मई तक जवाब तलब किया है। 

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प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि मरीजों को दी जाने वाली रेमडेसिविर, टॉइलीजुमाव और फवीपीरावीर की प्रदेश में किल्लत है। केवल पांच मुख्य शहरों के अस्पतालों शिमला, धर्मशाला, मंडी, नाहन और चंबा में ही डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल बनाए गए हैं, अन्य जिलों के मुख्यालय में सुविधा नहीं है। यहां ऐसा सिस्टम ही नहीं, जिससे पता चले कि सरकारी व निजी अस्पतालों में कितने सामान्य बेड, कितने आईसीयू और कितने वेंटिलेटर हैं। आरटी पीसीआर की रिपोर्ट 3 से 5 दिनों में आ रही है, इस बीच मरीजों की मौत हो जा रही है।

देरी से रिपोर्ट आने पर शव परिवार के सदस्यों को सौंप देते हैं और उनका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल से नहीं हो रहा। कुछ मामलों में शव घर ले जाने की इजाजत भी दी जा रही। इससे परिवार के अन्य सदस्य भी संक्रमित हो रहे हैं। मास्क न पहनने वालों और सोशल डिस्टेंसिंग पर कोई नजर नहीं है। अमीर और प्रभावशाली लोगों को ही उन अस्पतालों में दाखिल किया जा रहा है, जिसमें ऑक्सीजन उपलब्ध है। मध्यवर्गीय लोग, गरीब और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को बिना चिकित्सा छोड़ दिया जा रहा। लाइफ सेविंग ड्रग्स की सप्लाई पर राज्य सरकारों से केंद्र भेदभाव कर रहा है। 

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कोविड केंद्रों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन मुहैया कराए सरकार: हाईकोर्ट  

कोरोना से निपटने के लिए हाईकोर्ट ने सरकार को कई निर्देश जारी किए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने नाहन निवासी आशुतोष गुप्ता की याचिका की सुनवाई के बाद सरकार को आदेश दिया कि वह प्रदेश में कोरोना टेस्टिंग बढ़ाने के लिए लैब, क्लीनिक और अस्पताल संख्या बढ़ाए। मामले पर अगली सुनवाई 10 मई को होगी।
कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि रोजाना रैपिड एंटीजन किट और आरटी पीसीआर टेस्ट के अलावा दूसरे टेस्ट भी करें। टेस्टिंग सुविधा बढ़ाने के लिए उपकरणों से लैस मोबाइल वैन शामिल करने पर विचार हो।

कोर्ट ने सरकार को और अधिक समर्पित कोविड -19 अस्पताल बढ़ाने के साथ ही केंद्र सरकार की सहायता से अस्थायी अस्पताल बनाने पर भी विचार करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में यह सुनिश्चित करें कि वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और अन्य सुविधाएं हों। मीडिया के माध्यम से कोविड अस्पताल और टेस्टिंग सेंटर के बारे में लोगों को बताए। जो निजी अस्पताल कोविड टेस्ट औप अन्य सुविधाएं न दें, उनके खिलाफ  डीएम एक्ट एवं एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट के तहत कार्रवाई करें। कोर्ट ने सरकार से 18 से 44 उम्र के व्यक्तियों को टीकाकरण शुरू करने पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। 
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