हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चंबा के मोतला गांव के पास अवैध डंपिंग मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को आदेश दिए हैं कि वह दोषी अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा अदालत के समक्ष पेश करें। अदालत ने मलबे को हटाए जाने की प्रगति रिपोर्ट भी तलब की है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 5 सितंबर को निर्धारित की है। अदालत ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए थे।
अदालत ने कहा था कि विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ठेकेदार ने नाले में अवैध डंपिंग की है। प्रमुख अभियंता के शपथपत्र का अवलोकन करने पर अदालत ने पाया कि नाले के पास ही ठेकेदार को डंपिंग के लिए पांच जगह चिन्हित की गई है। अदालत ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पीने के पानी के टैंक से ऊपर की तरफ ही डंपिंग के लिए जगह चिन्हित करना कोई समझदारी का काम नहीं है। बारिश के दौरान सारा मलबा नीचे की तरफ बहता है और पीने के पानी को दूषित करता है।
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग की ओर से दायर रिपोर्ट का अवलोकन करने पर पाया था कि इस अवैध डंपिंग के लिए ठेकेदार जिम्मेदार है। अदालत को बताया गया था कि जुलाई 2021 और अगस्त 2022 के महीने में भारी बारिश के कारण मोतला गांव में मलबा जमा हो गया था। याचिकाकर्ता संजीवन सिंह की याचिका में आरोप लगाया गया है कि ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही की वजह से पूरे गांव में मलबा भर गया है। इससे कई घरों और गोशालाओं को भारी क्षति हुई है।