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जीत गया आठ साल का नवल, मिलेंगे 1.25 करोड़

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हिमाचल के चंबा के एक छोटे से गांव में रहने वाला मासूम नवल आखिरकार जीत गया। उसे सवा करोड़ रुपए मिलेंगे। कोर्ट ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। मामला चंबा का है। उच्च न्यायालय ने बिजली की हाईटेंशन तारों की चपेट में आने से स्थायी तौर पर अपंग हुए 8 वर्षीय नवल कुमार उर्फ रोहित को एक करोड़ 25 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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ये आदेश राज्य विद्युत बोर्ड को जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि उक्त राशि चंबा जिले के चुवाड़ी स्थित किसी भी राष्ट्रीय कृत बैंक में जमा कराई जाए। साथ ही प्रतिमाह इस राशि में से 10 हजार बच्चे के भरण-पोषण, दवाइयों और पढ़ाई के लिए जारी किए जाएं।

लापरवाही से गंवाई थी दोनों बाजुएं

जानकारी के अनुसार चंबा जिले के भोकड़ू नामक गांव में 18 मार्च, 2012 को सायं साढ़े तीन बजे जब नवल कुमार अपने खेत में परिवार के साथ गया था तो खेत के उपर से गुजर रही 11000 केवी की हाईटेंशन वायर की चपेट में आ गया।

उसकी दोनों बाजुएं बुरी तरह से झुलस गईं। अस्पताल में भर्ती किया गया तो बाजुओं को काटना पड़ गया। इस असहनीय दर्द से उबरने के बाद नवल और उसका परिवार न्याय के लिए कोर्ट पहुंचा।

आखिरकार कोर्ट ने भी इसे लापरवाही मानते हुए बोर्ड को मुआवजा देने के आदेश जारी कर दिए।

तत्तापानी की रोशनदेवी को भी मिला न्याय

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने व्यवस्था दी है कि विद्युत बोर्ड की लापरवाही के कारण हुए नुकसान पर रिट्ट याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट क्षतिपूर्ति हर्जाना दे सकता है। ये व्यवस्था देने के पश्चात कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेशों में पीड़ित परिवार को डेढ़ लाख की अंतरिम राहत देने के आदेश दिए।

तत्तापानी क्षेत्र में प्रार्थी रोशन देवी का पति वर्कशाप में काम करता था। हादसे के दिन जब वे तत्तापानी बाजार से गुजर रहा था तो बिजली की पांच तारों के संपर्क में उसकी मौत हो गई थी। प्रथम दृष्टय विद्युत बोर्ड की लापरवाही मानते हुए कोर्ट ने अंतरिम राहत के तौर पर डेढ़ लाख देने के आदेश दिए।
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नारी सेवासदन मामले में सरकार को नोटिस

उधर, हाईकोर्ट ने नारी सेवासदन में मशोबरा रह रही महिलाओं के मानव अधिकारों के उल्लंघन पर सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मानवीय संस्था उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र को जनहित याचिका मानकर उसकी सुनवाई के दौरान दिया।

नोटिस मुख्य सचिव, प्रधान सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, प्रधान सचिव स्वास्थ्य, निदेशक स्वास्थ्य, निदेशक कल्याण, उपायुक्त शिमला, जिला कल्याण अधिकारी, एसडीएम ग्रामीण और नारी सेवा सदन के इंचार्ज शामिल हैं। नारी सेवा सदन में 33 संवासी रह रहे हैं। इनमें 2 नाबालिग लड़कियां, 1 छह साल का लड़का और 30 महिलाएं रह रही है।

अजय श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में महिलाओं की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य और सफाई को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि नारी सेवा सदन में रह रही महिलाओं की स्थिति असंतोषजनक है। अधिकतर महिलाएं मानसिक रोगी हैं उन्हें मनोरोग अस्पताल में रखने के बजाय नारी सेवा सदन में रखा जा रहा है जहां उनकी देखभाल के लिए कोई विशेषज्ञ कर्मचारी भी नहीं है।
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