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हाईकोर्ट का आदेश: अनुबंध सेवाओं को वरिष्ठता, पदोन्नति और पेंशन के लिए जोड़ने पर 28 नवंबर तक फैसला करे सरकार

Thu, 15 Oct 2026 06:26 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अनुबंध के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवाओं को नियमितीकरण के बाद वरिष्ठता, पदोन्नति, इंक्रीमेंट और पेंशन लाभ के लिए जोड़ने पर आगामी 28 नवंबर तक अंतिम निर्णय ले। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अनुबंध के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवाओं को नियमितीकरण के बाद वरिष्ठता, पदोन्नति, इंक्रीमेंट और पेंशन लाभ के लिए जोड़ने पर आगामी 28 नवंबर तक अंतिम निर्णय ले। अदालत ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी 28 नवंबर या उससे पहले हर हाल में 15 दिसंबर 2023 के मूल फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करें। इस फैसले से प्रदेश के हजारों अनुबंध से नियमित हुए कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता यशिका गुलेरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए दिया। अदालत ने यह कदम राज्य सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से कोर्ट में दाखिल उस अनुपालन हलफनामे के बाद उठाया है, जिसमें सरकार ने माना कि सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।

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15 दिसंबर 2023 को हाईकोर्ट ने दिया था ये आदेश
यशिका गुलेरिया और अन्य कर्मचारियों के मामले में हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2023 को आदेश दिया था कि उनकी अनुबंध अवधि की सेवाओं को वरिष्ठता और अन्य लाभों के लिए काउंट करने पर विचार किया जाए। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जब सरकार ने इसे लागू नहीं किया, तो याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की। इस बीच शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश सेवा भर्ती एवं शर्तें अधिनियम 2024 का हवाला देकर कर्मचारियों के दावों को खारिज कर दिया था।
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 शिक्षा निदेशक ने कोर्ट को दिया था  हलफनामा
इसी तरह के एक अन्य मामले (देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार) में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को सरकार की विशेष अनुमति याचिका को सिरे से खारिज कर दिया और सरकार को इसे लागू करने के लिए चार महीने का समय दिया। उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा कोर्ट को दिए गए हलफनामे के अनुसार, सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए देवेंद्र कुमार के मामले की तर्ज पर ही इस याचिकाकर्ता (यशिका गुलेरिया) के केस में भी समान कार्रवाई कर रही है, जो वर्तमान में सरकार के विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने सरकार के इस बयान और सुप्रीम कोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड पर लेते हुए अवमानना कार्यवाही को बंद कर दिया।
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