प्रदेश की राजधानी शिमला के कनलोग कब्रिस्तान में प्रार्थना सभा करवाने पर हाईकोर्ट ने पादरी को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत के आदेशों के बाद भी पादरी वहां पर शुक्रवार और रविवार को प्रार्थना सभा करवा रहा है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के कनलोग कब्रिस्तान में प्रार्थना सभा करवाने पर हाईकोर्ट ने पादरी को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत के आदेशों के बाद भी पादरी वहां पर शुक्रवार और रविवार को प्रार्थना सभा करवा रहा है। हाईकोर्ट ने पहले ही अपने आदेश में कब्रिस्तान में हो रहे अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दिए थे। वहां पर सभी तरह की गतिविधियों पर बैन लगा रखा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने इस मामले को सुना।
अदालत में धरोहर कमेटी शिमला की ओर से अदालत के आदेशों की अनुपालना करते हुए कब्रिस्तान में अवैध निर्माण पर अपनी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने रिपोर्ट में जिक्र किया है कि अभी भी सीमेंेट फ्लोर नहीं हटाया गया है। सैम्यूल प्रकाश ने कहा कि ब्रिटिश की पहली छावनी जब शिमला आई थी, तब कनलोग के इस कब्रिस्तान में अग्रेजों को दफनाया गया। इसके बाद कनलोग कब्रिस्तान को हेरिटेज का दर्जा दिया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पादरी वहां पर लोगों के धर्म परिवर्तन का भी काम करता है। उन्होंने याचिका में कहा कि अदालत के आदेशों के बाद भी वहां पर गैर तरीके से निर्माण होता रहा। अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।