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हाईकोर्ट से उम्मीद, लौटेगी शिमला की पहचान

Wed, 23 Jul 2014 12:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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शिमला शहर की बंधित और प्रतिबंधित सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ रहीं गाड़ियां हेरिटेज कल्चर को तबाह कर रही हैं। यहां ट्रैफिक कुप्रबंधन और अवैध गाड़ियों की पार्किंग पर सरकार और प्रशासन हमेशा से खामोश रहे।
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यहीं से ऐतिहासिक शहर की बद्दतर हालत शुरू हुई। जनहित याचिका को स्वीकार करने के बाद अब प्रदेश उच्च न्यायालय के कड़े रुख से शिमला शहर का पुराना वैभव लौटने की उम्मीद जग गई है।

अमर उजाला इस मुद्दे को लगातार उठाता रहा है। इन खबरों की कटिंग को याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश किया। प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार से बंधित सड़कों पर गाड़ियों के चलाने के लिए जारी किए गए परमिटों की सूची मांगी है।
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अवैध पार्किंग को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इस बारे में भी जवाब तलब किया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ट्रैफिक व्यवस्था की बदहाली की वजह संबंधित अफसरों की लापरवाही है। इस कारण आम शहरी को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था कम है।

लेकिन बंधित और प्रतिबंधित सड़कों पर प्रभावशाली लोग और सरकारी गाड़ियां बिना रोड परमिट के दौड़ रही हैं। इतना ही नहीं, अब तो एचआरटीसी टैक्सियां, प्राइवेट एंबुलेंस भी बिना मरीज के बेरोकटोक चल रही हैं। सरकार के पास इन समस्याओं से निपटने की न तो कोई योजना है और न ही कोई बुनियादी ढांचा।

480 गाड़ियों को खड़ी करने की जगह
शहर में केवल 32 चिहिंत टैक्सी स्टैंड है। नगर निगम की 13 पैड पार्किंग हैं। इन पार्किंगों में कुल 480 गाड़ियां खड़ी करने की क्षमता है। इस वजह से शहर में अवैध पार्किंग हो रही है। अदालत ने नगर निगम को भी आदेश दिए कि वह स्टेट्स रिपोर्ट के माध्यम से बताए कि वह गाड़ियों की पार्किंग व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर क्या क्या कदम उठा रही है।

कोर्ट ने इसका भी मांगा ब्यौरा
प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकार से आईजीएमसी अस्पताल, कमला नेहरू अस्पताल और दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के भीतर और आसपास अवैध पार्किंगों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा मांगा है। बंधित और प्रतिबंधित सड़कों पर चल रहीं एचआरटीसी टैक्सी चलाए जाने को लेकर बनाई गई नीति पर भी जानकारी देने को कहा है।
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