इसके लिए अधिकारी निजी शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति जारी करने के लिए दस फीसदी तक कमीशन लेते थे। खबरों के मुताबिक जांच में पता चला है कि कमीशन का यह खेल होटलों में चलता था।
यहां पर स्कॉलरशिप जारी कराने के एवज में निजी संस्थान विभाग के अधिकारियों को कमीशन का पैसा देते थे। सीबीआई अब यह पता लगा रही है कि इस खेल में कितने लोग शामिल थे और कमीशन कितने लोगों में कैसे बंटता था।
इस बात की तस्दीक निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों से पूछताछ में भी हो चुकी है। इसके बाद ही शिक्षा विभाग के अधीक्षक अरविंद राज्टा सीबीआई के रडार पर आए।
सीबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि स्कॉलरशिप की स्वीकृति से संबंधित फाइलों को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया जाता था। निचले स्तर के अधिकारी, कर्मचारी फाइलों को अपने स्तर पर ही मार्क कर देते थे।
जांच में यह भी पता चला है कि नियमों के विपरीत निजी ई मेल आईडी से छात्रवृत्ति के काम को अंजाम दिया जाता था। उधर, सीबीआई की ओर से अदालत से गुहार लगाई गई कि चूंकि वह मामले कि जांच कर रही है तो इस स्थिति में सील कवर में रिपोर्ट दायर करने की अनुमति दी जाए, ताकि उनके द्वारा की गई
जांच सार्वजनिक न हो। अदालत ने सीबीआई की इस गुहार को स्वीकार किया और सील कवर में रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए। याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा निदेशक और सीबीआई को प्रतिवादी बनाया गया है।