धर्मशाला में चल रही निर्वासित तिब्बत सरकार को बंद करवाने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये की कॉस्ट के साथ खारिज कर दिया है। प्रतिवादियों ने प्रार्थी की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि उनकी पत्नी ने भी ऐसी ही याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर की थी, जिसे वहां खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने पाया की प्रार्थी खुद तिब्बती स्कूल में अध्यापक नियुक्त था।
उसे स्कूल प्रशासन ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। यही वजह है कि प्रार्थी हिमाचल का न होते हुए भी हिमाचल की भूमि की चिंता के बहाने अपना बदला लेने के लिए कोर्ट का नाजायज इस्तेमाल कर रहा है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए एक लाख रुपये कॉस्ट की राशि लीगल सर्विस अथॉरिटी के पास जमा करवाने के आदेश दिए।