देश की सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा को विश्व में सबसे पहले फतह करने वाले कर्नल प्रेम चंद (87) का बुधवार को कुल्लू में निधन हो गया। उन्हें हीरो ऑफ कंचनजंगा के नाम से जाना जाता था। पहाड़ों को नापने की उनकी हिम्मत और जुनून को देखते हुए भारतीय सेना ने कर्नल प्रेम को स्नो टाइगर के नाम से अलंकृत किया था।
देश के सर्वश्रेष्ठ पर्वतारोहियों में से एक कर्नल प्रेम चंद हिमालयन आउटडोर एडवेंचर अकादमी के संस्थापक थे। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। लाहौल-स्पीति जिले के लिंडूर गांव के रहने वाले कर्नल प्रेम जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के अग्रणी पक्षधर रहे। प्रेम चंद ने बहुत कम उम्र से ही पहाड़ों पर चढ़ना शुरू कर दिया था।
भारतीय सेना के साथ अपने करियर के दौरान और बाद में उन्होंने भूटान, सिक्किम, नेपाल, गढ़वाल, कश्मीर और पूर्वी काराकोरम समेत 30 से ज्यादा चोटियों को सफलतापूर्वक फतह किया था। उन्होंने अपना जीवन साहसिक कार्य के लिए समर्पित किया।
कर्नल प्रेम चंद को भारतीय पर्वतारोहण महासंघ ने पर्वतारोहण में निरंतर उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया था। उन्हें 1972 के शीतकालीन ओलंपिक के लिए भारतीय स्की टीम का नेतृत्व करने के लिए भी चुना गया था।