डेंगू मच्छर सूर्योदय के दो घंटे बाद तक और सूर्य अस्त होने के दो घंटे पहले ही व्यक्ति को डंक मारता है। इस समय में डेंगू मच्छर के प्रकोप से बचने के लिए प्रयास करने चाहिए। यह बात जिला स्वास्थ्य अधिकारी कांगड़ा डॉ. राजेश गुलेरी ने की। उन्होंने कहा कि अब डेंगू मच्छर कहीं पर भी पनप सकता है। पहले स्लम एरिया में डेंगू मच्छर होने की ज्यादा संभावनाएं रहती थी।
लेकिन पिछले साल कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्र में अचानक डेंगू के मामले आने के बाद अब हिमाचल में किसी भी स्थान पर डेंगू मच्छर पनप सकता है। इसलिए डेंगू मच्छर से बचाव के बारे में हर व्यक्ति को जागरूक रहने की जरूरत है। जिससे डेंगू की चपेट में लोग न आ सकें। अगर कोई आ भी जाता है, तो समय रहते इसका उपचार किया जा सके। सीएमओ कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि डेंगू मच्छर पनपने का एक कारण ग्लोबल वार्मिंग भी है।
बिलासपुर और सोलन में आए सबसे ज्यादा मामले
पिछले साल डेंगू ने हिमाचल में बहर बरपाया था। प्रदेश में लगभग 4800 लोग डेंगू से ग्रस्त हुए थे। छह लोगों की मौत हो गई थी। इस बार स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने की तैयारी पहले ही शुरू कर दी है। बिलासपुर और सोलन जिले में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले आए थे।
बिलासपुर में 2100, सोलन में 1730, कांगड़ा में 150, कुल्लू में चार, हमीरपुर में 12, मंडी में 590, सिरमौर में 10, शिमला में 135, ऊना में 90, चंबा में आठ मामले सामने आए थे। इसके अलावा बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा, सिरमौर, सोलन और ऊना जिले में एक-एक व्यक्ति की डेंगू से मौत हो गई थी।
इस साल अभी तक आ चुके हैं आठ मामले
जनवरी 2019 से अभी तक प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में डेंगू से ग्रस्त संभावित 191 मरीजों के खून के सैंपलों की जांच की गई है। आठ मरीजों में डेंगू होने की पुष्टि हुई है। कांगड़ा में पांच, हमीरपुर, मंडी और शिमला में एक-एक मामला सामने आया है।