अब नित नई बीमारियों का जन्म हो रहा है। चिकित्सा विज्ञान भी इनसे निजात पाने को निरंतर प्रयोग और अनुसंधान कर रहा है। कितनी ही ऐसी बीमारियां थीं, जो कभी लाइलाज मानी जाती थीं और आज उनका इलाज सरलता से किया जा सकता है।
फिर भी कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के इलाज को हम अभी भी संघर्षरत हैं। आम तौर पर कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही मान लिया जाता है। यह सही नहीं है। 108 एंबुलेंस सेवा ने मरीजों को जागरूक करने के मकसद से अलर्ट जारी किया है।
जीवीके ईएमआरआई 108 के राज्य प्रमुख मेहुल सुकुमारन का कहना है कि हार्ट अटैक में हार्ट का पंप अचानक काम करना बंद देता है। हार्ट के मार्फत यह असर फेफड़े, मस्तिष्क सहित अन्य अंगों में हो जाता है।
कैसे पहचानें कार्डियक अरेस्ट ही है?
जब आक्सीजनयुक्त रक्त हृदय को पहुंचाने वाली वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है, लेकिन पंप चलता चलता रहता है। कार्डियक अरेस्ट हार्ट में एक तरह की इलेक्ट्रिक समस्या होती है। हृदय में रक्त प्रवाह बाधित होने से हार्ट अटैक होता है। ऐसी स्थिति में तुरंत 108 को कॉल करने की सलाह दी है।
ऐसे पहचाने
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में व्यक्ति पूरी तरह से निढाल हो जाता है। दिल की धड़कन में अचानक ठहराव हो जाता है। सांस लेने की जगह हांफने लगता है। अगले कुछ मिनटों में उपचार मिल जाए तो व्यक्ति को बचाया जा सकता है। कार्डियक अरेस्ट रिबर्सेबल होता है। यानी, हार्ट को दोबारा क्रियाशील बनाया जा सकता है।
हार्ट अटैक के ये हैं लक्षण
हार्ट अटैक की स्थित में व्यक्ति के सीने में तेज दर्द होता है। शरीर में ऐंठन भी होने लगती है। तेजी से पसीना आता है। सीने में जलन, उल्टी भी हो सकती है। महिलाओं के मामले में उदर में तेज दर्द होता है। कार्डियक अरेस्ट और अटैक में फर्क होता है। ऐसे में जल्द मरीज को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
छाती का दर्द और हार्ट अटैक
मृत्यु अथवा हृदय की किसी मांसपेशी को नुकसान खून की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण होता है। हार्ट अटैक तब पड़ता है, जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनी में रक्त पहुंचाने में बाधा उत्पन्न होती है।
यह बाधा धमनियों में वसा जैसे पदार्थों के जम जाने के कारण पैदा होती है। वसा का यह जमाव ही खून के थक्के को फाड़ता है और धमनी को बाधित करता है। इससे हार्ट अटैक पड़ता है।
कार्डियक अरेस्ट हो तो क्या करें
इमरजेंसी सर्विसेज 108 पर कॉल करें और सीपीआर देना शुरू करें। हार्ट बंद होने की स्थिति में सीपीआर देना ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे हार्ट के दोबारा सक्रिय होने की संभावना रहती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले व्यक्ति की नब्ज का मुआयना किया जाता है। यह नब्ज उसके गले के मध्य से दाईं या बाईं तरफ जांची जानी चाहिए।
यदि नब्ज गायब होती है, तभी हम सीपीआर का प्रयोग कर सकते हैं।हमें उसकी सांस की जांच करनी चाहिए। सीपीआर केवल उस व्यक्ति में किया जाता है, जिसकी न तो सांस चल रही हो और न नब्ज। सीपीआर छाती के मध्य में 30 बार छाती दबा कर और उसके बाद दो बार सांस देकर करना चाहिए। यह प्रक्रिया 13 सेकंड के अंदर पूरी हो जानी चाहिए (एक मिनट में सौ बार)।
इस दबाव की प्रक्रिया की गहराई दो ढाई सेंटीमीटर से पांच सेंटीमीटर होनी चाहिए। (लेकिन यह प्रक्रिया मरीज की आयु के हिसाब से दी जाती है)। यह प्रक्रिया तब तक करनी चाहिए, जब तककोई समुचित चिकित्सीय सहायता न मिल जाए। अगर दो व्यक्ति हैं तो घड़ी-घड़ी लगातार सीपीआर दें। यह क्रम नहीं टूटना चाहिए।