हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार के हाटी समुदाय को एसटी दर्जा देने के विरोध में दायर की गईं याचिकाओं पर सोमवार को प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, जो पौने दो घंटे चली। सुनवाई के दौरान अदालत ने गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति की ओर से लगाई गई याचिका को सुना।
गुर्जर कल्याण परिषद सिरमौर की ओर से लगाई गई याचिका को भी सुनवाई में शामिल किया गया है। वहीं, कुछ अभ्यर्थियों ने जनजाति से जुड़े प्रमाण पत्रों की मांग भी की है। इन मामलों पर सुनवाई पूरी नहीं होने के कारण मंगलवार को भी ये जारी रहेगी। इस मामले में गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति और गुर्जर समाज कल्याण परिषद का आरोप है कि गिरिपार इलाके के हाटी समुदाय को एसटी आरक्षण दिया जाना न्यायोचित नहीं है। बिना जनसंख्या सर्वेक्षण के हाटी समुदाय को जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया है।
इनका ये भी आरोप है कि प्रदेश में कोई भी हाटी जनजाति नहीं है और आरक्षण का अधिकार हाटी के नाम पर उच्च जाति के लोगों को दे दिया गया, जो कानूनी तौर पर गलत है। किसी भी भौगोलिक क्षेत्र को किसी समुदाय के नाम पर तब तक एसटी घोषित नहीं किया जा सकता, जब तक वह अनुसूचित जनजाति के रूप में सजातीय होने के मानदंड को पूरा नहीं करता। उधर, हाटी समुदाय के लोग एसटी अधिनियम लागू नहीं करने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
केंद्रीय हाटी समिति नाहन और शिलाई में प्रदर्शन कर चुकी है। केंद्रीय हाटी समिति से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ने एसटी का दर्जा दे दिया। राष्ट्रपति ने गजट अधिसूचना जारी कर दी तो केंद्र सरकार इसे लागू क्यों नहीं कर रही। वहीं, गुर्जर कल्याण परिषद सिरमौर और गिरिपार अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति ने एसटी दर्जे के विरोध में उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की हैं। इन पर सुनवाई चल रही है।