शिमला। आईजीएमसी में स्क्रब टायफस थमने का नाम नहीं ले रहा। शुक्रवार को एकसाथ दस नए मामले स्क्रब टायफस के आए। इसमें सबसे अधिक आठ मरीज शिमला और आसपास के क्षेत्रों से हैं। दो मरीज सोलन और करसोग से हैं। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने इसकी पुष्टि की है।
शहर से ही एकाएक स्क्रब टायफस के आठ नए मामलों के आने से लोगों में हड़कंप मचा हुआ। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल में यह जो मरीज इस बीमारी की गिरफ्त में है, यह सभी ओपीडी में इलाज करवाने आए थे। मरीजों को ओपीडी में प्राथमिक उपचार देने के बाद घर भेज दिया है। मौजूदा समय में आईसीयू और वार्ड में भी स्क्रब टायफस के मरीज दाखिल हैं। शुक्रवार को शिमला से दीपक (42), विद्यावती (78), प्रोमिला (35), विमला (51), केवला (60), लता (24), दीक्षा (13), जनक (5) और सोलन से देवी सिंह (67) और करसोग की जमना (55) की रिपोर्ट पाजिटिव आई। अब तक इस बीमारी से सात लोगों की मौत हो चुकी है। आईजीएमसी में अब तक 1690 से अधिक सैंपलों को जांच के लिए लैब में भेजा जा चुका है। इनमें से 154 से अधिक मरीजों के सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई चुकी है। अस्पताल में अभी 20 मरीज दाखिल हैं जिसमें आठ पुरुष और आठ महिलाओं के अलावा चार बच्चे शामिल हैं।
सिरदर्द और जोड़ों में होता है दर्द
स्क्रब टायफस बरसात के मौसम में घास में पनपने वाले पिस्सू के काटने से होता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षण मरीज को सिरदर्द होना, बुखार के साथ जोड़ों में दर्द, शरीर में दर्द, कंपकंपी और शरीर पर लाल दाने पड़ना है। इसके अलावा थकावट महसूस होती है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकों के पास उपचार करवाने आना चाहिए।
लोग ऐसे करें बचाव
चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि घरों के आसपास घास और झाड़ियां न उगने दें। घरों के पास सफाई का खास ध्यान रखें। इसके अलावा खेतों में काम करने के दौरान पैर और बाजूओं को अच्छे से ढककर रखें ताकि कोई जीव जंतु काट न सके। पार्क में टहलते हुए या पेड़ पौधों के बीच जाने से पहले पूरे बाजू के कपड़े पहनें। दो दिन से अधिक बुखार हो तो तुरंत उपचार करवाना चाहिए। इसके अलावा रक्त की जांच भी करवानी चाहिए।