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अब आईजीएमसी के डॉक्टर खुद करेंगे किडनी ट्रांसप्लांट

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अब आईजीएमसी के डॉक्टर खुद करेंगे किडनी ट्रांसप्लांट
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यूरोलॉजी के विशेषज्ञ चिकित्सक ट्रांसप्लांट करने में सक्षम, एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में होंगे कुछ ट्रांसप्लांट
एम्स के डॉॅॅ. वीके बंसल आज लौट जाएंगे दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक भी अब किडनी ट्रांसप्लांट के ऑपरेशन कर सकेंगे। प्रशिक्षित सर्जन न होने से अब तक यहां किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं थी। सोमवार को हुए दो ऑपरेशनों के बाद अब यह सेवा अब अस्पताल में सुचारु रूप से शुरू हो जाएगी। इसके लिए आईजीएमसी के डॉक्टरों को बाकायदा विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
गुर्दे के रोगियों को छह सालों से ट्रांसप्लांट केवल एक सपना लग रहा था। हालत यह थी कि अस्पताल में न तो विशेषज्ञ सर्जन थे और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। लिहाजा प्रदेशभर के मरीजों को मजबूरन लाखों रुपये खर्च करके पीजीआई चंडीगढ़ और फोर्टीज का रुख करके ट्रांसप्लांट करवाना पड़ रहा था। लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टर वीके बंसल की अगुवाई में किए ऑपरेशन के बाद से उम्मीद जगी है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अभी भी कुछ ऑपरेशन एम्स के प्रशिक्षित डॉक्टरों की निगरानी में ही होंगे। प्रदेश में गुर्दे के रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ रही है।
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अस्पताल मूलभूत सुविधाओं और समुचित स्टाफ की व्यवस्था न होने से किडनी ट्रांसप्लांट करवाना कामयाब नहीं हो पा रहा था। इसके बाद प्रबंधन ने एम्स में आईजीएमसी के यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया के अलावा नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण दिलाया। अस्पताल में अब यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंपोश रैना और डॉ. गिरीश ट्रांसप्लांट करेंगे। नेफ्रोेलाजी के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय विक्रांत, सहायक प्रोफेसर डॉ. अजय जरयाल और उनकी टीम पोस्ट आपरेटिव केयर करेंगी। मंगलवार को विशेषज्ञ सर्जन डॉ. वीके बंसल और डॉ. संजय अग्रवाल दिल्ली लौट आएंगे। इसके बाद डॉ. पंपोश रैना और डॉ. गिरीश के नेतृत्व में मरीजों का इलाज होगा।
क्या था पहले मामला
साल 2013 में आईजीएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर स्थापित करने की घोषणा की थी। सरकार ने बजट जारी किया और दो साल का वक्त दिया। लेकिन आईजीएमसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। किडनी ट्रांसप्लांट शुरू न करने के पीछे कई वजह बताकर असमर्थता जताई। लिहाजा सरकार ने जारी किए बजट को ब्याज समेत लौटाने को कहा। आईजीएमसी ने सरकार के खाते में करीब एक करोड़ 62 लाख रुपये जमा कर उम्मीदों पर पानी फेर दिया। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद सीएम ने पहली घोषणा की थी लेकिन एक साल बाद भी शुरू नहीं होने से बाद में प्रक्रिया पूरी की गई।
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स्वास्थ्य मंत्री को देते हर पल की जानकारी
प्रदेश में पहली मर्तबा हो रहे किडनी ट्रांसप्लांट पर सबकी नजरें थीं। अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी स्वयं सीटीवीएस ऑपरेशन थियेटर में बैठकर हर पल की जानकारी मंत्री को भी देते रहे। स्वास्थ्य मंत्री के शिमला न होने के बावजूद भी प्रशासनिक अधिकारी मरीजों के किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर पल-पल का स्टेटस मंत्री जी को फोन पर देते रहे।
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