पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद अब देश में जनसंख्या नियंत्रण का माहौल तैयार करना होगा। देश में बढ़ते अपराध के मूल में जनसंख्या बढ़ोतरी से उत्पन्न बेरोजगारी और गरीबी है। भारत की प्रति व्यक्ति आर्थिकी 2 हजार डॉलर है, जबकि अमेरिका की 55 हजार डॉलर है।
जनसंख्या की बढ़ोतरी के कारण ही देश के 20 हजार करोड़ से अधिक लोग मात्र 5 हजार रुपये प्रतिमाह पर गुजारा कर रहे हैं। शांता सोमवार को सोलन में बढ़ती जनसंख्या घटते संसाधन विषय पर संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। कहा कि बढ़ती जनसंख्या देश की सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है। स्वतंत्रता के समय जहां भारत की जनसंख्या 34 करोड़ थी वहीं अब जनसंख्या लगभग 141 करोड़ हो चुकी है।
प्रतिदिन जनसंख्या में 50 हजार की बढ़ेातरी हो रही है। कहा कि हम विश्व में गरीबी सूचकांक पर 103वें क्रमांक पर हैं, जबकि कुछ वर्ष पहले हम 97वें क्रमांक पर थे। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी एवं कुपोषण के कारण मृत्युदर के मूल में जनसंख्या की बढ़ोत्तरी है। कुपोषण के कारण होने वाली मृत्यु का एक तिहाई भारत में है। जनसंख्या की वृद्धि के कारण हमारे संसाधनों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
लिंगानुपात विषय पर जागरूकता जरूरी: परमार
स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि केंद्र तथा प्रदेश सरकार इस ज्वलंत समस्या को लेकर गंभीर है। प्रयास किया जा रहा है कि सर्वप्रथम लोगों को लड़का-लड़की की समानता एवं लिंगानुपात के विषय में जागरूक किया जाए। हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि के कारणों में से एक कारण लड़के की चाह भी है। देश तथा प्रदेश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया जा रहा है। कहा कि आशा कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी जनसंख्या नियंत्रण के विषय में जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक बना रहे हैं।