पंजाब राज्य के ऊर्जा मंत्री हरभजन सिंह
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पंजाब राज्य के ऊर्जा मंत्री हरभजन सिंह ने कहा कि एशिया के सबसे पहले रोपवे पर दौड़ने वाली हेरिटेज ट्रॉली को बरोट तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। नौ दशक पुरानी ट्रॉली का आधारभूत ढांचा भी नए स्वरूप में दिखेगा। पंजाब का विद्युत बोर्ड लोहे और लकड़ी की बनी ट्रॉली को मेट्रो ट्रेन की तरह विकसित करने की तैयारी की जा रही है। हेरिटेज ट्रॉली और रोपवे के जीर्णोद्धार पर अनुमानित तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने परियोजना के उच्चाधिकारियों के साथ वींच कैंप तक ट्रॉली में सफर करने के बाद यह जानकारी मीडिया से साझा की। उन्होंने बताया कि करीब 16 सौ मीटर स्टील रोपवे को भी बदला जा चुका है। इससे रोमांच का सफर और भी सुरक्षित होगा। बफर जोन से वींच कैंप तक करीब ढाई किलोमीटर तक स्टील रोप को बदलने के साथ-साथ चार किलोमीटर ट्रैक को 2,300 नए स्लीपरों से चकाचक कर दिया गया है।
हेरिटेज ट्रॉली के लोहे के ढांचे को स्टील में बदलकर इसे मेट्रो की लुक दी जाएगी। इसमें करीब 15 से 20 लोग एकसाथ सफर कर सकेंगे। इसका लाभ पर्यटकों को भी मिले, इस पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। पंजाब राज्य के ऊर्जा मंत्री ने बरोट पहुंचकर पुरानी और नई रेजरवायर का निरीक्षण किया और बैटी होम में रात्रि ठहराव कर शानन पावर हाउस के इतिहास से जुड़ी जानकारियां भी हासिल कीं। शानन परियोजना के अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि हेरिटेज ट्रॉली को नया स्वरूप दिलाने के लिए ऊर्जा मंत्री ने भी हामी भरी है। जबकि, परियोजना प्रबंधन ने हेरिटेज रोपवे पर रोमांच के सफर को और भी सुरक्षित करने के लिए जहां स्टील रोप को बदला है। वहीं, दशकों पुराने बिछे लकड़ी के स्लीपरों को भी नए सिरे से बदलकर स्थापित कर दिया है।
जोगिंद्रनगर में 1926 में स्थापित हुआ था एशिया का पहला रोपवे
मंडी जिले के जोगिंद्रनगर के शानन में एशिया का पहला रोपवे वर्ष 1926 में स्थापित हुआ था। उस दौरान रेजरवायर के निर्माण के साथ पैनस्टॉक की पाइपलाइन बिछाने के लिए ब्रिटिश नागरिक कर्नल बैटी ने इसका इस्तेमाल किया था। बफर जोन से वींच कैंप तक करीब साढ़े चार किलोमीटर टैंक पर अभी भी दो ट्रॉलियां आवागमन करती हैं। वींच कैंप से जीरो प्वाइंट बरोट तक के खस्ताहाल ट्रैक को दुरुस्त कर ट्रॉली बरोट तक पहुंचाने पर भी मंथन शुरू हुआ है। कांउटर वेट टेक्नोलॉजी के माध्यम से 110 शानन पावर हाउस के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली भारी भरकम मशीनरी को बरोट स्थित रेजर वायर में पहुंचाने के लिए इसको इस्तेमाल में लाया गया था। मौजूदा समय में परियोजना के पैन स्टॉक और पाइपलाइन की देखरेख और मरम्मत के लिए हेरिटेज ट्रॉली को परियोजना के कर्मचारियों के लिए प्रयोग किया जाता है।