एचआरटीसी कर्मचारियों के वर्क टू रूल पर जाने के कारण मंगलवार को प्रदेश भर में निगम के सैकड़ों रूट फेल हुए। आठ घंटे ड्यूटी के बाद ड्राइवर-कंडक्टर बसों से उतर गए। एचआरटीसी कर्मियों के बीच दिन भर यह भी चर्चा रही कि परिवहन मंत्री के इशारे पर ही एचआरटीसी की कर्मचारी यूनियनें वर्क टू रूल पर गई हैं। इस मामले पर अमर उजाला ने परिवहन मंत्री जीएस बाली से कुछ सीधे सवाल पूछे।
सवाल : हड़ताल के कारण पब्लिक परेशान न हो, इसके लिए क्या कोई प्रयास किए गए?
बाली : यह हड़ताल नहीं है, कर्मचारी ‘वर्क टू रूल’ पर हैं, रूल यानी नियमों के तहत काम कर रहे हैं।
नोटिस देकर गए हैं कर्मचारीः बाली
सवाल : तो क्या कर्मचारियों का एकाएक ‘वर्क टू रूल’ पर जाना सही है ?
बाली : वर्क टू रूल पर जाने से पहले कर्मचारियों ने नोटिस दिया था, नोटिस के तहत ही कर्मी वर्क टू रूल पर गए हैं।
सवाल : तो क्या आप एचआरटीसी कर्मियों की हड़ताल को जायज मानते हैं?
बाली : एचआरटीसी में हर कैटेगरी की लगभग 27 फीसदी पोस्टें खाली हैं। कर्मचारियों पर काम का बोझ है। आम कर्मचारी रिटायरमेंट ऐज बढ़ाने की मांग करते हैं, मेरे पास लोग ऐज दस साल कम करने की मांग लेकर आ रहे हैं।
सवाल: रिक्त पदों को भरने के लिए एचआरटीसी क्या प्रयास कर रहा है?
बाली : मामला न्यायालय के विचाराधीन हैं, हमने पहले भी न्यायालय से भर्तियों पर लगी रोक हटाने की प्रार्थना की थी, और अब दोबारा भी करने जा रहे हैं।
मंत्री तो हड़ताल रोकते हैं, करवाते नहीं
सवाल : कहा जा रहा है कि आपके इशारे पर ही एचआरटीसी कर्मी हड़ताल पर गए हैं?
बाली : मंत्री हड़ताल नहीं करवाते, मंत्री हड़ताल रोकते हैं।
सवाल : कर्मचारी हड़ताल से वापिस नहीं लौटते तो क्या उनके खिलाफ कार्रवाई होगी?
बाली : रूल के तहत काम करने पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कैसे की जा सकती है।
सवाल: क्या आप कर्मचारियों से काम पर वापिस लौटने का आग्रह करेंगे?
बाली : हम कर्मचारियों से अपील ही कर सकते हैं, पहले भी की थी, अब भी करेंगे।