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ग्राउंड रिपोर्ट: क्लाइमेट स्मार्ट स्कूल चियोग की अनोखी पहल, जिओ-टैगिंग से तैयार किया वैज्ञानिक रिकॉर्ड

Sun, 01 Mar 2026 09:30 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, चियोग (ठियोग)

सार

 चियोग इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चियोग पर्यावरण संरक्षण की एक जीवंत प्रयोगशाला बन गई है।
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क्लाइमेट स्मार्ट चियोग स्कूल के नन्हे वैज्ञानिक। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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शिमला जिले का एक छोटा सा कस्बा चियोग इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चियोग पर्यावरण संरक्षण की एक जीवंत प्रयोगशाला बन गई है। क्लाइमेट स्मार्ट स्कूल का दर्जा प्राप्त इस स्कूल के बच्चों ने वह कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े शोधकर्ताओं के लिए चुनौती होता है। स्कूल के गुलमोहर इको क्लब के छात्रों ने स्कूल से सटे एशिया के सबसे घने जंगल में मानसून की नमी के बीच जंगली मशरूम की 200 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों की पहचान करने का दावा किया है। 

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छात्रों ने केवल मशरूम ही नहीं ढूंढा, बल्कि जियो-टैगिंग के जरिए उनका सटीक वैज्ञानिक रिकॉर्ड भी तैयार किया है।  देवदार के पेड़ों, सूखी लकड़ियों और दीमक के टीलों पर पाए गए इन मशरूमों में औषधीय गुणों से भरपूर किस्मों से लेकर बेहद जहरीले मशरूम तक शामिल हैं। जीपीएस की मदद से अब इन मशरूमों की लोकेशन और प्रजाति को डिजिटल मानचित्र पर ट्रैक किया जा सकता है।

पौधों से दोस्ती, बच्चे सुनते हैं पत्तियों की सरसराहट...इको क्लब की प्रभारी सविंता चौहान बताती हैं कि बच्चों का पौधों से ऐसा रिश्ता बन गया है कि वे उनसे बातें करते हैं। बच्चों का मानना है कि पत्तों की सरसराहट पौधों की भावनाएं हैं। स्कूल के हर्बल गार्डन में एलोवेरा, सौंफ और अजवाइन जैसी 100 से अधिक औषधीय प्रजातियां लगाई गई हैं। क्लब गौरैया का बसेरा विकसित कर रहा है। गौरैया को बचाने के लिए स्कूल परिसर में 10 कृत्रिम घोंसले लगाए गए हैं, जहां पक्षियों की चहचहाहट गूंजनी शुरू हो गई है।

हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें मिट्टी और अपनी जड़ों से जोड़ना है। जब बच्चा एक पौधे को बचाने की कला सीख जाता है, तो वह भविष्य का एक जिम्मेदार नागरिक अपने आप बन जाता है।
- संदीप कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य

 

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प्रधानाचार्य की अनूठी पहल मेहनत का फल हवाई सैर
स्कूल की इस सफलता के पीछे प्रधानाचार्य संदीप कुमार शर्मा की दूरगामी सोच है। उन्होंने शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक अनूठा प्रयोग किया है, जिसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। पहले स्कूल के टॉपर 65-70 प्रतिशत अंक लाते थे लेकिन जब से प्रधानाचार्य ने टॉपर्स को अपने निजी खर्च पर हवाई यात्रा कराने का वादा किया तो स्पर्धा ऐसी बढ़ी कि अब बच्चे 95 प्रतिशत से अधिक अंक ला रहे हैं। प्रधानाचार्य ने एक पूर्व छात्र और स्थानीय निवासी होने के नाते अपनी जेब से 10 लाख रुपये खर्च कर स्कूल का एक ब्लॉक बनवाया और विभाग को समर्पित किया है।
 
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