छात्रों ने केवल मशरूम ही नहीं ढूंढा, बल्कि जियो-टैगिंग के जरिए उनका सटीक वैज्ञानिक रिकॉर्ड भी तैयार किया है। देवदार के पेड़ों, सूखी लकड़ियों और दीमक के टीलों पर पाए गए इन मशरूमों में औषधीय गुणों से भरपूर किस्मों से लेकर बेहद जहरीले मशरूम तक शामिल हैं। जीपीएस की मदद से अब इन मशरूमों की लोकेशन और प्रजाति को डिजिटल मानचित्र पर ट्रैक किया जा सकता है।
पौधों से दोस्ती, बच्चे सुनते हैं पत्तियों की सरसराहट...इको क्लब की प्रभारी सविंता चौहान बताती हैं कि बच्चों का पौधों से ऐसा रिश्ता बन गया है कि वे उनसे बातें करते हैं। बच्चों का मानना है कि पत्तों की सरसराहट पौधों की भावनाएं हैं। स्कूल के हर्बल गार्डन में एलोवेरा, सौंफ और अजवाइन जैसी 100 से अधिक औषधीय प्रजातियां लगाई गई हैं। क्लब गौरैया का बसेरा विकसित कर रहा है। गौरैया को बचाने के लिए स्कूल परिसर में 10 कृत्रिम घोंसले लगाए गए हैं, जहां पक्षियों की चहचहाहट गूंजनी शुरू हो गई है।
हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें मिट्टी और अपनी जड़ों से जोड़ना है। जब बच्चा एक पौधे को बचाने की कला सीख जाता है, तो वह भविष्य का एक जिम्मेदार नागरिक अपने आप बन जाता है।
- संदीप कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य