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ओलावृष्टि से हरी सब्जियों की फसलें तबाह, मैदान बन गए खेत

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टमाटर, फ्रासबीन, खीरे और शिमला मिर्च की फसल को भारी नुकसान
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70 फीसदी तक फसलों को पहुंचा है नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर बाद हुई ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने सब्जियों की फसलों को पूरी तरह से तबाह कर दिया। दस से पंद्रह मिनट में ही किसानों की तीन से चार माह की मेहनत बर्बाद हो गई।
राजधानी से सटी शिमला ग्रामीण की शकराह, चलहोग, भलोह, गलोट, पनेश, शामला घाट और धमून सहित अन्य पंचायतों में सब्जियों की फसलें बर्बाद हुई हैं। लोगों के मुताबिक 60 से 70 फीसदी तक फसलें खराब हो गई हैं। गर्मियों के मौसम में लगाए टमाटर, खीरे, फ्रासबीन, शिमलामिर्च और बैंगन आदि की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इन ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर हैं। मार्च से लेकर मई माह तक किसानों ने गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था कर किसी तरह खेतों में लगाए टमाटर और फसलों को बचाए रखा। लेकिन ओलावृष्टि ने सब तबाह कर दिया।
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चलहोग पंचायत के नालहट्टी, चलहोग, भलोह पंचायत के बडायड में सबसे अधिक नुकसान हुुआ है। चलहोग पंचायत के किसान सुनील ठाकुर ने बताया कि उनके टमाटर के करीब तीन हजार पौधों की फसल तबाह हो गई है। फ्रासबीन का चार किलो बीज लगाया था पूरा खेत मैदान बन गया है। भलोह पंचायत के किसान राजेश ठाकुर ने बताया कि खीरे, टमाटर और फ्रांस बीन की फसल बर्बाद हो गई। नालहट्टी के किसान विनय शंकर, केशव राम, लायक राम सहित अन्य किसानों का कहना है कि सारी मेहनत बर्बाद हो गई।
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किसानों को मुआवजा दे सरकार : कुमार
गलोट पंचायत के उपप्रधान राजेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी पंचायत में गर्मियों के टमाटर की फसल बर्बाद हुई है। बैंगन और शिमला मिर्च आदि की फसल भी ओलों के कारण तबाह हो गई हैं। कहा कि क्षेत्र में हर परिवार कृषि कर सब्जियां उगाता है। इसलिए क्षेत्र के किसानों का इस ओलावृष्टि और तूफान से भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने सरकार से फसलों के हुए नुकसान का आकलन करवा कर मुआवजा देने की मांग की है।
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