कहा कि डाक विभाग ने नियमित कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का सितंबर 2016 से भुगतान कर दिया है, जबकि ग्रामीण डाक सेवकों के वेतनमान निर्धारण करने को बैठाई गई कमलेश चंद्रा कमेटी की रिपोर्ट ढाई साल बाद भी लागू नहीं की जा रही है।
ग्रामीण डाक सेवक पुराने वेतनमान पर काम कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग की तर्ज पर कमलेश चंद्रा रिपोर्ट को ग्रामीण डाक सेवकों के वेतनमान में सुधार के लिए जनवरी 2016 में बैठाया गया था।
इसमें सुझाए वेतनमान के अनुसार ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन में बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन ढाई साल बाद भी कमलेश चंद्रा रिपोर्ट को लागू नहीं किया जा रहा है। उधर, डाक विभाग ने हड़ताल से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। मंडल स्तर पर कंट्रोल रूम बना दिए गए हैं। ग्रामीण डाक सेवकों से भी विभागीय अधिकारी संपर्क में हैं।