इस मामले की पुलिस जांच इंस्पेक्टर शेर सिंह और इंस्पेक्टर अनंत राम ने की। मुकदमे की पैरवी जिला न्यायवादी चंद्रशेखर भाटिया और उप न्यायवादी अनुज शर्मा ने की। अदालत में कुल 28 गवाह पेश हुए। सहकारी सभा के सचिव सुनील कुमार के खिलाफ धारा 420, 467 और 468 के तहत पांच वर्ष की कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
जुर्माना न भरने पर छह माह का अतिरिक्त कैद और धारा 201, 120 बी में 3 साल कठोर कारवास व तीन हजार रुपये जुर्माना किया गया। ऑडिटर चुन्नी लाल को पीसी एक्ट के तहत चार साल की कठोर कैद की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना किया गया। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा और धारा 120 में तीन वर्ष की कैद
और 3 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। सभा के छह सदस्यों रतन चंद डोगरा, संतोष कुमार, राज कुमार, बहादुर सिंह, मदन लाल और केहर सिंह को धारा 420 में पांच साल की कठोर कैद और 5 हजार रुपये जुर्माना और धारा 120 बी में तीन साल की जेल और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।