प्रदेश की 3226 पंचायतों में मनरेगा और 14वें वित्तायोग के तहत विकास कार्य ठप हो गए हैं। सरकार की ओर से चेतावनी पत्र जारी होने के बाद भी ग्राम रोजगार सेवक शुक्रवार से हड़ताल पर चले गए हैं।
संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार ग्राम सेवकों की मांगें नहीं मानती, काम पर नहीं लौटेंगे। संघ ने दो टूक कहा है कि ग्राम सेवक धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। जायज मांगों को लेकर हड़ताल पर गए हैं।
प्रदेश में 1081 ग्राम रोजगार सेवक हैं, जो अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इनके हड़ताल पर जाने से पंचायतों के काम के लिए न तो मस्टररोल जारी होंगे और न ही श्रमिकों को पेमेंट हो सकेगी।
इसी तरह से प्रदेश में चल रहे जियो टैगिंग, जॉब कार्ड की वेरिफि केशन का कार्य भी प्रभावित होगा। ग्राम सेवक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शिवराज ठाकुर ने कहा कि सभी ग्राम सेवक एकजुट हैं।
सभी ने एक साथ काम छोड़कर हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। सरकार और विभाग को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था। ग्राम रोजगार सेवकों की मांगों को लेकर सरकार हमेशा गंभीर रही है। लेकिन अधिकारी सरकार को गुमराह कर इसमें अड़ंगा डाल रही है।