कोरोना कर्फ्यू के चलते प्रदेश में ग्रामसभाओं का आयोजन नहीं हो रहा है। ऐसे में ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के तहत नए काम बिना ग्रामसभा की स्वीकृति के शुरू करवाने की योजना बनाई है। अब किसी को व्यक्तिगत काम मनरेगा के तहत करवाना है, तो उसके लिए सिर्फ आवेदन करना होगा। उसके बाद पंचायत काम शुरू करने को स्वीकृति दे देगी।
ग्रामीण विकास विभाग का पंचायतों में ‘मनरेगा समग्र’ कार्यक्रम कारगर साबित होगा, जिसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, बागवानी, पशुपालन एवं मछली पालन की गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए व्यक्तिगत कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा। ‘मनरेगा समग्र’ के अंतर्गत केंचुआ खाद पिट के लिए 9000, बकरी शेड निर्माण के लिए 35000, मुर्गी आश्रय निर्माण के लिए 40,000, गोशाला के लिए 35000, सूअर बाड़े के लिए 35,000, फलदार, औषधीय, पशु चारे वाले शहतूत पौधरोपण, ओजोला पौधरोपण, किचन गार्डन, फूलों की नर्सरी, मत्स्य पालन के लिए तालाब निर्माण, भूमि समतलीकरण, भूमि कटाव को रोकने हेतु सुरक्षा दीवार निर्माण, कूहल के निर्माण और कंटूर/ग्रेडड बांध/ खेत बांध के निर्माण तथा वर्षा जल संग्रहण टैंक के लिए एक-एक लाख रुपये की राशि, शौचालय निर्माण के लिए 15,000 और उसके लिए खड्डा बनाने को 8000 रुपये खर्च करने का प्रावधान है।
मनरेगा के तहत नए काम शुरू करने के लिए ग्रामसभा से स्वीकृति की जरूरत नहीं है। कोई भी मनरेगा समग्र के तहत काम के लिए पंचायत ऑफिस में जाकर आवेदन कर सकता है। उसके बाद पंचायत काम को स्वीकृति देगी।
- वीरेंद्र कंवर, ग्रामीण विकास मंत्री