मरीजों को मुफ्त में दवाएं न दीं तो डॉक्टरों समेत सुपरवाइजरी अधिकारी भी नपेंगे। हिमाचल सरकार ने इस संबंध में दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अस्पताल में दवा होने पर मरीजों को केमिस्ट की दुकान पर नहीं भेजा जाएगा। प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
सक्सेना ने मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, चिकित्सा अधीक्षकों और ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत करवाया है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट भी इस मामले की सख्त निगरानी कर रहा है।
अधिकारियों को कहा गया है कि रोगियों के लिए जेनेरिक और मुफ्त दवाएं ही लिखें। डॉक्टरों को कहा गया है कि वे भारतीय चिकित्सा परिषद के आदेशोें के मुताबिक ही दवाएं लिखें। मरीजों के चेकअप के बाद केवल जेनेरिक दवाएं ही लिखी जाएं।
ऐसी कोई भी दवा पर्ची पर न लिखी जाए जो अस्पताल की मुफ्त दवा की सूची में शामिल न हो। उन्होंने कहा कि जिन डॉक्टरों को ऐसा करते हुए पाया गया है, उन्हें चेतावनी दी जाती है कि भविष्य में इसे न दोहराएं।
सुपरवाइजरी अधिकारी को भी आदेश जारी किए गए हैं कि वे आवश्यक मुफ्त दवाओं को अस्पताल में सुनिश्चित करें नहीं तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।