जयराम सरकार में मंत्रियों और विधायकों के तबादला संबंधी डीओ नोट की सचिवालय में बेकद्री से माननीय नाराज हैं। सामान्य तबादलों पर रोक के तर्क पर अफसर इन डीओ नोट को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं। अपने चहेते मुलाजिमों के मामलों के साथ अफसरों के ऐसे बर्ताव से माननीयों को फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।
नुमाइंदों ने अब इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने की तैयारी कर ली है। इनकी नाराजगी है कि पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कई कर्मचारियों को जनजातीय क्षेत्रों और कई को 50 से 100 किलोमीटर दूर भेजा गया था। लेकिन अब ये कर्मचारी व अधिकारी मंत्रियों और विधायकों के डीओ नोट लगाकर वापस आना चाहते हैं।
मंत्रियों की ओर से उनके तबादले के डीओ नोट जारी हो रहे हैं लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री ने सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध लगा रखा है। अगर कोई भी तबादला होना है तो वह मुख्यमंत्री के आदेशानुसार ही होगा। ऐसे में तबादलों की सभी फाइलें मुख्यमंत्री को जा रही हैं।
इनकी स्वीकृति के बाद ही विभाग के अधिकारी तबादला आदेश जारी कर सकते हैं। अब कर्मचारी भाजपा नेताओं के साथ प्रतिदिन सचिवालय में मंत्रियों के पास पहुंच रहे हैं। यहां यही बात कही जा रही है कि फाइल का पता नहीं चल रहा है। सरकार के एक मंत्री ने कहा कि तबादलों से संबंधित कई सारे मामलों पर अफसरशाही गंभीर नहीं है। अब इन मामलों को लेकर सीधा सीएम से बात की जाएगी।