ये महत्वपूर्ण बदलाव किया
सरकार ने संशोधित विधेयक के माध्यम से कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब कर्मियों को ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभनहीं मिलेंगे। कर्मचारियों की वरिष्ठता उनके नियमित होने पर ही तय होगी। अनुबंध सेवाकाल को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए है, जिनकी वरिष्ठता को लेकर पहले अदालत से आदेश जारी किए गए थे। इस विधेयक का उद्देश्य नियमित सरकारी कर्मचारियों एवं अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मियों के हितों के बीच तालमेल स्थापित करना है।
2003 में शुरू हुईं अनुबंध आधार पर नियुक्तियां
हिमाचल में अनुबंध आधार पर नियुक्तियां 2003 में शुरू हुईं। इसमें नियुक्ति पत्रों में सेवा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख किया गया। कर्मचारियों को बताया गया था कि अनुबंध के तहत उनका कार्यकाल वरिष्ठता. या नियमित कर्मचारियों को मिलने वाले अन्य लाभों के लिए नहीं गिना जाएगा। विधेयक के अनुसार अनुबंध के आधार पर नियुक्ति करने का उद्देश्य उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान मानने का कभी नहीं था। उनकी सेवा शर्तें उनकी ओर से हस्ताक्षरित समझौतों से नियंत्रित होती हैं और इस प्रकार वे नियमित नियुक्तियों के समान सार्वजनिक सेवाओं का हिस्सा नहीं हैं।
हित होंगे प्रभावित
अनुबंध कर्मचारियों के लिए यह निर्णय हितों से कुठाराघात है। उन्हें अपनी सेवा अवधि को वरिष्ठता निर्धारण में जोड़ने का अधिकार नहीं मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सरकारी सेवा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उठाया है।