हिमाचल में बस हादसे रोकने के लिए कीनिया की तकनीकी अपनाने की तैयारी है। राज्य में लोहे के पिल्लरों वाली बसें खरीदी जा सकती हैं। यूपीएसआरटीसी अधिकारियों ने यह ऑफर हिमाचल सरकार को दिया है। ऐसी बसें यूपी से भी खरीदी जा सकती हैं। इन्हें यूपीएसआरटीसी फिलहाल अपने लिए खुद बना रहा है।
इसके नमूने हिमाचल को दिए जा सकते हैं। एसोसिएशन ऑफ स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग्स द्वारका दिल्ली ने शिमला में रोड सेफ्टी पर एक सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें यूपीएसआरटीसी के अधिकारी विशेष रूप से मौजूद हुए। यहां पर यूपीएसआरटीसी के महाप्रबंधक तकनीकी पीके पंडित ने एक शोध पत्र पढ़ा।
उन्होंने कीनिया की केवीएम लिमिटेड के रॉल्फ हरुश्चका एमएससी के एक रिसर्च पेपर को पढ़ा। कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर यहां पर बसों के भीतर लोहे के पिल्लरों वाली बसों को चलाने की जरूरत है। अगर ये खाई में लुढ़क भी जाएं तो भी उन बसों की धज्जियां न उड़ें, जैसे हिमाचल में उड़ती हैं।
कीनिया में इस तरह की बसों को बनाने और चलाने के प्रयोग हुए हैं। यूपीएसआरटीसी भी कीनिया की तकनीक पर खुद बसें बना रही है। एक साल में 100 बसें बनाई जा रही हैं। अगर हिमाचल को भी ऐसी बसों को जरूरत हो तो एसआरटीसी भी इस राज्य को इन्हें उपलब्ध करवा सकता है।
सभी बातों पर करेंगे गौर : बाली
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि इस सम्मेलन में जितनी भी बातें सामने आ रही हैं, उन सभी पर गौर किया जा रहा है। उन्होंने माना कि हिमाचल की बसों को पहाड़ों के अनुकूल तकनीक से तैयार नहीं किया जा रहा है।