शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि निजी स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक संवेदनशील है। इसे लेकर सावधानियां बरतने की जरूरत है। मामला अभी चर्चा में है। गहन मंथन करने की अभी और जरूरत है। विधानसभा परिसर में मंगलवार को मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने कहा कि अभी परामर्श का दौर जारी है।
सरकार इसे लेकर जल्दबाजी में नहीं है। कोरोना काल में अभिभावकों की ओर से फीस से जुड़ीं समस्याएं सामने आई हैं। इसके चलते ही कानून बनाने के विचार पर काम शुरू किया गया है। एक अन्य सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने कहा कि विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार कला शिक्षकों के पद भरने के लिए संस्तुति भेज दी गई है।
स्कूलों की फीस पर सरकार के पलटी मारने से घमासान
वहीं, निजी स्कूलों की मनमानी और अलग-अलग तरीके से अभिभावकों से की जाने वाली वसूली को रोकने के लिए कानून बनाने के मुद्दे पर मंत्रिमंडल की बैठक में लिए यू टर्न को छात्र-अभिभावक मंच ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। मंच का आरोप है कि सरकार सही मायने में ऐसा कोई कानून लागू ही नहीं करना चाहती। सरकार की इच्छा शक्ति में कमी है।
छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, फालमा चौहान, बिंदु जोशी ने कहा कि निजी स्कूलों की फीस, प्रवेश प्रक्रिया तथा पाठ्यक्रम को संचालित करने के लिए कानून बनाने, रेगुलेटरी कमीशन गठित करने की मांग पर बीते रोज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कोई फैसला नहीं लिया गया। अभिभावकों को उम्मीद थी कि बैठक में विधेयक को लाने और इसे कानून का रूप देने के लिए विधानसभा में ले जाया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में इस मसले को टालने से स्पष्ट हो गया है कि यह सरकार निजी स्कूलों पर नकेल कसने को कानून लागू ही नहीं करना चाहती है। उन्होंने मांग उठाई कि निजी स्कूलों की ट्यूशन फ ीस के अतिरिक्त अन्य सभी प्रकार के शुल्क वसूलने पर रोक लगाने के लिए अधिसूचना जारी की जाए। वर्ष 2021 में किसी भी निजी स्कूल को फीस बढ़ोतरी की इजाजत न देने की सरकार से मांग उठाई।
कानून बनाने में की जा रही देरी से संघ नाराज
संघ की मंगलवार को कोर कमेटी की हुई बैठक में कानून बनाने में की जा रही देरी पर नाराजगी जाहिर की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी, संयुक्त सचिव हमिंद्र धौटा, सचिव सीएल शर्मा, रमेश शर्मा, कोषाध्यक्ष शालू नेगी, उपाध्यक्ष बबली संतोष, जितेंद्र यादव और सलाहकार रमेश ठाकुर ने उम्मीद जताई कि इसी सत्र में यह बिल विधानसभा में पारित कर आम जनता को राहत देगी।