वित्तीय संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश को उबारने के लिए कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। राज्य में घाटे में चल रहे तीस निगम और बोर्डों को बंद करने के लिए कदम उठाया जा सकता है।
इस सिलसिले में जल्द ही कैबिनेट सब कमेटी रिसोर्स एंड मोबलाइजेशन की ओर से प्रदेश सरकार को संस्तुति की जा सकती है।
ऐसा न होने की स्थिति में कई निगमों और बोर्डों को विलय कर सरकारी खर्चों में कटौती की भी सिफारिश करने की तैयारी है।
एक दशक से ये निगम और बोर्ड घाटे से नहीं उबर पा रहे हैं। ऐसे में इन निगमों और बोर्डों को सरकार की ओर से वित्तीय मदद मुहैया करानी पड़ती है, जिससे इनका संचालन किया जा सके। जबकि, प्रदेश सरकार खुद आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है।
सरकार के ऊपर 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। ऐसे में सरकार यह चाहती है कि सरकारी खर्चों में कटौती की जाए। साथ ही आय के नए संसाधन तलाश किए जाएं।