हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन (जीएडी) विभाग के सचिव को अदालत में तलब किया। प्रदेश सरकार में आयुर्वेद विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव की सिफारिश पर उनके चालक को सरकारी आवास आवंटित कर दिया, जबकि प्रार्थी सुमित शर्मा के आवेदन पर गौर नहीं किया। यह मामला आज न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया था।
हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश की नौकरशाही को कर्मचारियों को सरकारी आवास आवंटन में बंदरबांट करने पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत में विभाग की आवास आवंटन पर सरकार की अपनाई जा रही भेदभाव पूर्ण नीति पर की कड़ी टिप्पणी। हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन (जीएडी) विभाग के सचिव को अदालत में तलब किया। प्रदेश सरकार में आयुर्वेद विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव की सिफारिश पर उनके चालक को सरकारी आवास आवंटित कर दिया, जबकि प्रार्थी सुमित शर्मा के आवेदन पर गौर नहीं किया। यह मामला आज न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया था।
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अदालत ने मामले की सुनवाई आगामी 8 दिसंबर को निर्धारित की और सरकार को अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। अदालत को बताया गया कि सुमित शर्मा ने आवंटित आवास को चेंज करने के लिए जीएडी विभाग के पास आवेदन मार्च, 2021 में दिया। इस पर विभाग का कहना है कि जिस आवास के आवंटन के लिए प्रार्थी ने आवेदन दिया है वह अप्रैल, 2022 में खाली होगा। इस पर अभी कोई कार्रवाही नहीं की जा सकती। दूसरी ओर, यही आवास चमन लाल नामक चालक को अगस्त, 2021 में आवंटित कर कर दिया, क्योंकि यह आवास पहले वाले कर्मी ने खाली कर दिया था। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत ली गई सूचना में यह जानकारी सामने आई कि चमन लाल को आवास आवंटित करते समय प्रार्थी के आवेदन को नजर अंदाज किया गया। आयुर्वेद विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के आग्रह पर यह आवास आवंटित किया गया है। प्रार्थी ने यह जानकारी अदालत के समक्ष अपनी याचिका के साथ संलग्न की है।