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Shimla News: सरकार ने नगर निगम को सौंपी चार बड़ी पार्किंग, आवंटन की शर्तें तय

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स्मार्ट सिटी प्रबंधन का टेंडर रद्द, निगम चलाएगा पार्किंग, 30 फीसदी जगह स्थानीय लोगों और 20 फीसदी दुकानदारों को मिलेगी
50 फीसदी जगह रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को मिलेगी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में विवादों में रही स्मार्ट सिटी की चार बड़ी पार्किंग आखिरकार सरकार ने नगर निगम को सौंप दी हैं। स्मार्ट सिटी प्रबंधन की ओर से किए टेंडर को रद्द करते हुए इनका जिम्मा अब नगर निगम को सौंपा गया है।
संकटमोचन, टुटू, ऑकलैंड और एसडीए परिसर कसुम्पटी की बहुमंजिला पार्किंग अब निगम चलाएगा। इस बारे में सोमवार को सरकार की ओर से पत्र नगर निगम को मिल गया है। इस पत्र में पार्किंग के आवंटन को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार पार्किंग में 30 फीसदी जगह स्थानीय लोगों को गाड़ियां खड़ी करने के लिए आवंटित की जाएंगी। 20 फीसदी जगह स्थानीय बाजार के दुकानदारों के लिए आरक्षित होगी। बाकी 50 फीसदी जगह रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को आवंटित की जा सकेगी। सरकार से आधिकारिक पत्र मिलने के बाद नगर निगम ने भी इनके संचालन की तैयारी कर ली है। अभी अगले कुछ महीनों के लिए मासिक आधार पर इनका आवंटन किया जाएगा। अगले सप्ताह से ही इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करवाने की तैयारी है। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर इनका आवंटन किया जाएगा। नगर निगम का कहना है कि इसके बाद टेंडर कर ठेकेदार के जरिये इनका संचालन किया जाएगा। इनमें शहर की बाकी पार्किंग की दरों के अनुसार ही शुल्क लिया जाएगा।
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सैकड़ों वाहनों को मिलेगी पार्किंग सुविधा
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बनी इन चार पार्किंग में 650 से ज्यादा वाहन पार्क किए जा सकेंगे। एसडीए परिसर कसुम्पटी में 350, ऑकलैंड में 145, टूटू में 90 और संकटमोचन में करीब 110 वाहनों को पार्किंग की सुविधा मिलेगी। नगर निगम अभी एसडीए, ऑकलैंड और टूटू की पार्किंग के लिए आवेदन लेगा। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि जल्द ही इनका संचालन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को इन पार्किंग में प्राथमिकता दी जाएगी। नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि सरकार से इन्हें चलाने की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही आगामी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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सीएम के दरबार पहुंच गया था पार्किंग विवाद
स्मार्ट सिटी की इन पार्किंग का विवाद कई महीने तक चला। उद्घाटन होने के बावजूद इन्हें कई महीनों से आम जनता के लिए नहीं खोला जा रहा था। दरअसल, स्मार्ट सिटी प्रबंधन की ओर से की गई टेंडर प्रक्रिया पर महापौर सुरेंद्र चौहान ने आपत्ति जताई थी। महापौर का कहना था कि सभी पार्किंग निगम को मिलनी हैं। ऐसे में स्मार्ट सिटी प्रबंधन अपने स्तर पर इनका टेंडर और समझौता नहीं कर सकता। मामला सीएम के पास पहुंचा, जिसके बाद इन्हें निगम को सौंपने के निर्देश जारी किए गए। निगम को इनसे हर महीने लाखों रुपये की आय होने की उम्मीद है।
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