रोहतांग, बारालाचा में भी कम गिरे फाहे
सैलानियों की पहली पसंद रहे रोहतांग दर्रा में इस सीजन में भी बहुत कम बर्फबारी हुई है। 20 से 25 फीट बर्फ से लकदक रहने वाले दर्रा में इस बार सात से आठ फीट बर्फ होने का अनुमान है। मनाली-लेह मार्ग पर बारालाचा, शिंकुला, कुंजुम और जलोड़ी दर्रा के साथ छोटा व बड़ा शिगरी ग्लेशियरों में भी अपेक्षा से बहुत कम बर्फ गिरी है।
रावी बेसिन के ग्लेशियरों को ज्यादा खतरा
केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में पर्यावरण विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं छोटा और बड़ा शिगरी ग्लेशियर पर शोध कर रहे डॉ. अनुराग ने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के ताजा सर्वे के मुताबिक हिमालय रेंज में कुल 9500 छोटे-बड़े ग्लेशियर हैं। इनमें हिमाचल के चिनाब बेसिन में 989, रावी बेसिन में 94, सतलुज बेसिन में 258 और ब्यास बेसिन में 144 ग्लेशियर हैं। इनमें अधिकतर ग्लेशियर छोटे हैं।
रावी बेसिन में 95 फीसदी ग्लेशियरों की औसतन लंबाई एक से दो वर्ग किलोमीटर है और असमय बर्फबारी से इन ग्लेशियरों को सबसे ज्यादा खतरा है। इसमें बड़ा शिगरी, छोटा शिगरी, कुलटी, शिपिंग, डिंग कर्मो, तपन, ग्याफांग, मणिमहेश, शिली, शमुंद्री, बोलूनाग, तारागिरी, चंद्रा, भागा, कुगती, लैंगर, दोक्षा, नीलकंठ, मिलंग, मुकिला, मियाड, लेडी ऑफ केलांग, गैंगस्टैंग, पेराड, सोनापानी, गोरा, तकडुंग, मंथोरा, करपट, उलथांपू, थारोंग, शाह ग्लेशियर, पटसेउ, हामटा, पंचनाला सहित सैकड़ों ग्लेशियर असमय बर्फबारी से सिकुड़ रहे हैं।