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बेटियों ने कायम की मिसाल, सात साल से पुलिस के पास नहीं आया कोई मामला

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इसीलिए कहते हैं ‘बेटी ही बचाएगी’। हिमाचल के जन जातीय जिला लाहौल स्पीति की बेटियों ने पहले घाटी में पेड़-पौधों को बचाने के अभियान को बनाया तो अब कुछ वर्षों से दस हजार फीट ऊंचाई पर पाए जाने वाले दुर्लभ वन्य प्राणी आईबैक्स (टंगरोल) को बचाने का बीड़ा उठाया है।
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इसके शानदार परिणाम भी सामने आने लगे हैं। पिछले सात वर्षों से यहां पुलिस और वन विभाग के पास अवैध शिकार का एक भी मामला नहीं आया है। आईबैक्स के झुंड घाटी में बेखौफ विचरण करते नजर आ रहे हैं।

लाहौल की पढ़ी-लिखी बेटियों ने महिला मंडलों के माध्यम से एलान किया था कि जो भी इस शाकाहारी टंगरोल का शिकार करता हुआ पाया गया उसका हुक्का-पानी बंद कर बहिष्कार कर दिया जाएगा।
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महिला मंडल कोलंग की प्रधान बेचेन पालमो के अनुसार शिकार पर प्रतिबंध के बाद अब यहां रिहायशी क्षेत्र में भी आईबैक्स बेखौफ घूमते नजर आ रहे हैं। घाटी में पहले मांस के लिए आईबैक्स सबसे आसान शिकार होता था।

1000 लड़कों पर 1031 लड़कियां

ये दुर्लभ वन्य प्राणी पाए जाते हैं यहां- स्नो लैपर्ड, आईबैक्स, पाइका, घोरल, काला-भूरा भालू, हिमालयन रेड फॉक्स और लिंक्स। जनजातीय जिले लाहौल स्पीति में दशकों पहले से लिंग अनुपात में बेटों के मुकाबले बेटियां आगे हैं। मौजूदा समय में जिले में 1000 लड़कों पर 1031 लड़कियां हैं। ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद लाहौल की बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति का अधिकार नहीं है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल हाईकोर्ट अधिकार देने के आदेश दे चुके हैं। डीएफओ वाइल्ड लाइफ काजा राजेश शर्मा ने बताया कि बेटियों की पहल सराहनीय है। लोगों में जागरूकता से अवैध शिकार रुका है। विभाग के पास आईबैक्स का ताजा आंकड़ा तो नहीं लेकिन इसके झुंड अब आम देखे जा सकते हैं।
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क्या है आईबैक्स

आरओ पटन रेंज मस्त राम ने बताया कि वन विभाग के रिकॉर्ड पर गौर करें तो सात साल से भी अधिक समय से आईबैक्स के शिकार का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। यह लाहौल की बेटियों की बदौलत ही हुआ है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जंगली बकरे आईबैक्स कहलाते हैं।

इनके लंबे-लंबे और मुड़े हुए सींग होते हैं। इस हिमालयन आईबैक्स को साइबेरियन आईबैक्स की उपप्रजाति कहा जाता है। ये छोटे-छोटे झुंडों में चलते हैं। एक झुंड में 50 तक आईबैक्स होते हैं। आईबैक्स घास खाते हैं। ये बर्फानी तेंदुओं के आसान शिकार होते हैं। सर्दियों में बर्फ गिरने के बाद ये आबादी की ओर उतर आते हैं।
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