क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए जर्मनी की दो एजेंसियां हिमाचल को वित्तीय मदद करेंगी। सोमवार को 15 सदस्यीय टीम ने धर्मशाला के आसपास के जंगलों का दौरा किया।
इस दौरान जंगलात महकमे के अफसरों और जर्मनी की 15 सदस्यीय टीम के बीच सहमति बनी। प्रदेश को लगभग 340 करोड़ रुपये देने पर जर्मनी तैयार है। इसमें से लगभग 25 करोड़ रुपये तकनीकी स्पोर्ट के लिए और 315 करोड़ रुपये वित्तीय मदद देने पर सहमति बनी है।
इसके तहत धर्मशाला और चंबा में ओख के जंगल लगाए जाएंगे। इन दोनों ही क्षेत्रों में चीड़ के जंगल हैं, जिससे बड़े पैमाने पर आग लगने की घटनाएं होती हैं। इसके साथ ही लैंटाना हटाकर घास के मैदान विकसित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीणों को जानवरों के लिए आसानी से चारा उपलब्ध हो सके।
इस दौरान पीसीसीएफ आरके गुप्ता, एपीसीसीएफ संजीवा पांडे सहित जंगलात महकमे के अन्य धिकारी मौजूद रहे। रविवार को टीम ने मंडी में 191 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना में अनुदान देने पर सहमति जताई थी।
ओख की क्यों पड़ी जरूरत
लगभग तीन साल पहले इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बंगलूरू की ओर से हिमाचल प्रदेश में हो रहे जलवायु परिवर्तन पर एक अध्ययन किया गया था, जिसमें धर्मशाला और चंबा को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया था। उस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए इन दोनों ही वन वृत्तों में ओख के जंगल लगाने की योजना बनाई जा रही है।