अस्पताल प्रबंधन की ढील पड़ रही भारी, मरीजों को खरीद कर लाना पड़ रहा सामान
क्रॉसर
कंपनी से नहीं मिल रही है वैक्सीन की सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में नार्मल सेलाइन और गैस्ट्रिक इंजेक्शन का टोटा हो गया हैं। आपात स्थिति में इलाज करवाने आने वाले मरीजों को यह इंजेक्शन बाजारों से खरीदकर लाने पड़ रहे हैं। इसके चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आलम यह है कि कई महीनों से अस्पताल में यह दवाइयां नहीं मिल रहीं, इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन इनकी आपूर्ति नहीं कर सका। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में रोजाना सैकड़ों की तादाद में इलाज के लिए मरीज आते हैं। इनमें से कई सड़क हादसों में गंभीर रूप से अस्पताल पहुंचते हैं। इस दौरान मरीजों का काफी खून बह जाता है। इस वजह से मरीजों का बीपी गिरना तक शुरू हो जाता है। इस दौरान चिकित्सक मरीजों को नार्मल सेलाइन देते हैं। लेकिन काफी समय से इन इंजेक्शन की सप्लाई न आने से मरीज परेशान हैं।
इसके अलावा अस्पताल में गैस्ट्रिक की बीमारी में लगाया जाने वाला इंजेक्शन भी खत्म हो गया है। ऐसे में प्रदेशभर से इलाज के लिए अस्पताल आए मरीज परेशान हैं। दूसरी ओर प्रबंधन को इसकी जानकारी है, लेकिन वह इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है। अस्पताल में औसतन 25 सौ से तीन हजार के करीब ओपीडी रहती है। आपात स्थिति में सौ से डेढ़ सौ के करीब मरीज इलाज के लिए आते हैं।
निदेशक को लिखा है पत्र
सूत्रों का कहना है कि जो कंपनी अस्पताल को सामान उपलब्ध करवाती थी वह अब इस सामान की आपूर्ति नहीं कर रही। लिहाजा अब अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस बात की जानकारी निदेशक को चिट्ठी के माध्यम से दी है। कब तक सप्लाई मिलेगी इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन भी कुछ बोलने से बच रहा है।
डायरिया होने पर दिया जाता हैै नार्मल सेलाइन
डायरिया होने पर भी मरीजों को नार्मल सेलाइन दिया जाता है। चिकित्सा की भाषा में इसे लिक्वड फूड भी कहा जाता है। इमरजेंसी और अन्य वार्डों में इलाज करवाने आए मरीजों को यह आजकल यह सामान बाहर से मंगवाना पड़ता है।