प्रदेश में गुठलीदार फलों का उत्पादन करने वाले बागवान संकट में आ गए हैं। सूखे के कारण फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। चेरी बाजार में आना शुरू हो गई है, लेकिन बारिश न होने से चेरी का आकार नहीं बढ़ रहा।
बीते करीब दो माह से पर्याप्त बारिश न होने के कारण गुठलीदार फलों के बगीचे तनाव की स्थिति में आ गए हैं। सूखे के कारण आधी फसल तबाह हो गई है। नगदी फसल के रूप में गुठलीदार फलों की बागवानी करने वाले बागवानों को भारी नुकसान हो रहा है। हिमाचल के प्लम ग्रोवर फोरम ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार से बागवानी के लिए आपातकाल की घोषणा कर बागवानों का केसीसी लिमिट पर ब्याज माफ करने की मांग उठाई है।
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प्रदेश में गुठलीदार फलों का उत्पादन करने वाले बागवान संकट में आ गए हैं। सूखे के कारण फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। चेरी बाजार में आना शुरू हो गई है, लेकिन बारिश न होने से चेरी का आकार नहीं बढ़ रहा। इस कारण चेरी को अच्छे रेट नहीं मिल रहे हैं।
ऊपरी शिमला में स्टोन फ्रूट की फसल प्रभावित हो रही है। कोटगढ़, कुमारसैन, थानाधार और ननखड़ी में चेरी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। सूखे के कारण बादाम का आकार नहीं बढ़ रहा है। प्लम, खुमानी और आड़ू की फसल पर भी मौसम की मार पड़ रही है। ऊपरी शिमला के हजारों बागवानों की आय का मुख्य साधन गुठलीदार फल हैं।
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सूखे से फसल को भारी नुकसान, राहत दे सरकार : सिंघा
सूखे से गुठलीदार फलों की फसल के भारी नुकसान हुआ है। बगीचे तनाव की स्थिति में हैं। सरकार को तुरंत बागवानी के लिए आपातकाल की घोषणा करनी चाहिए। बागवानों को केसीसी लिमिट पर ब्याज माफ कर राहत दी जानी चाहिए। - दीपक सिंघा, अध्यक्ष, प्लम ग्रोवर फोरम, हिमाचल प्रदेश